बुधवार को बिना किसी ठोस वजह के अफवाहों के दम पर अनिल अंबानी समूह की सभी कंपनियों के शेयरों पर जबरदस्त हमला किया गया। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को एक समय 25.14 फीसदी गिराकर साल के नए न्यूनतम स्तर 492.85 रुपए पर पहुंचा दिया गया। हालांकि वो बंद हुआ 18.79 फीसदी की गिरावट के साथ 534.70 रुपए पर। अभी कल मंगलवार तक यह शेयर 658.40 रुपए पर था और आज दिन में ऊपर 666 रुपए तक चला गया था।औरऔर भी

बार-बार पलटकर हमला करना मंदड़ियों और तेजड़ियों दोनों की फितरत है। तेजड़िये तीन से चार बार बाजार को ऊपर की तरफ खींचते हैं। लेकिन खरीद से ज्यादा सप्लाई होते ही कदम पीछे खींच लेते हैं। मंदड़ियों का हमला और पीछे हटना भी इसी तरह चलता है। अभी तक मंदड़िये कामयाब रहे हैं क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता, मुद्रास्फीति, घोटाले, भ्रष्टाचार और अधिक मूल्यांकन ने उनके लिए माकूल हालात पैदा कर रखे थे। हालांकि मंदड़ियों की कोशिश बदस्तूर जारी है।औरऔर भी

जब बाजार मूलभूत या फंडामेंटल स्तर पर मजबूत हो, तब मंदड़ियों की फांस की अंतहीन चर्चा करते रहने का कोई तुक नहीं है। मंदड़िये इस समय उसी तरह शॉर्ट सौदे किए बैठे हैं, जिस तरह उन्होंने लेहमान संकट के बाद कर रखा था। एक मंदड़िये ने उस संकट के दौरान बाजार से 4800 करोड़ रुपए बनाए थे और 450 करोड़ रुपए का एडवांस टैक्स भरा। लेकिन जब बाजार का रुख पलटा तो सब कुछ गंवा बैठा। इतिहासऔरऔर भी

बाजार के रुख और रवैये का बदलना अब इतना आसान नहीं रह गया है क्योंकि ट्रेडरों का बहुमत मानता है कि हम निफ्टी में 5500 व 4700 की तरफ जा रहे हैं। वे मानते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ेगा और इससे बाजार की स्थितियां जटिल हो जाएंगी। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। हालांकि उनके तर्क में दम नहीं नजर आता, लेकिन उनकी हरकतें पूरी तरह उनकी सोच के अनुरूप हैं। 100औरऔर भी

बाजार में कल 337 अंक के तेज सुधार के बाद मंदड़ियों की तरफ से बिकवाली का आना लाजिमी था। फिर इनफोसिस के नतीजे भी चौंकानेवाले नहीं निकले। 30-32 के पी/ई अनुपात पर अगर आप इनफोसिस द्वारा बाजार को पीछे छोड़ देने की बात सोचते हैं तो यह भारत की दूसरे नबंर की आईटी कंपनी से वाकई कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना हो जाएगा। हालांकि निवेशकों का एक वर्ग इस स्टॉक को तब तक पसंद करता रहेगा जबऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी

आयकर अपीली न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने नया आदेश जारी कर बोफोर्स के भूत को फिर से जिंदा कर दिया है। लेकिन समझ में नहीं आता कि 24 साल पुराना यह मामला जा कहां रहा है। आईटीएटी के बाद अब यह मसला बॉम्बे हाईकोर्ट में जाएगा और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में। तब तक रिश्वतखोरी के इस कांड से जुड़े सभी लोग स्वर्ग सिधार चुके होंगे। विन चड्ढा तो पहले ही दिवंगत हो चुके हैं। फिलहाल अहम सवाल यहऔरऔर भी

2010 में बाजार से तेज रफ्तार से भागने वाले स्टॉक्स को भूल जाओ। वो साल पीछे छूट चुका है। अब तो साल 2011 में बाजार को पछाड़ने वाले नए दबंग स्टॉक्स बनेंगे। इस साल मंच संभालने वाले सेक्टर होंगे – इंफ्रास्ट्रक्चर, रीयल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल, चाय और फर्टिलाइजर। निफ्टी 5700 तक नीचे जाने के बाद वापस 6200 के करीब पहुंच चुका है जहां से उसकी नई ऊंचाई ज्यादा दूर नहीं है। आखिर निफ्टी इतनी तेजी से नई ऊंचाईऔरऔर भी

जहां तक निफ्टी का ताल्लुक है, वह अब प्रतिरोध का स्तर तोड़ चुका है और 6500 अंक की तरफ बढ़ रहा है। आज का दिन जय जलाराम का हो गया लगता है। कहने का मतलब यह है कि फिजिकल सेटलमेंट के न होने के चलते बाजार चलानेवालों ने अपनी मनमर्जी से स्टॉक्स को नचाया है। हालांकि इसमें कुछ नया नहीं है। यह हमारे शेयर बाजार का दस्तूर बन चुका है। अभी बाजार में तूफान के पहले कीऔरऔर भी

बॉम्बे डाईंग के साथ ऐसा क्या बुरा हो गया जो उसे इस सेटलमेंट में ठोंककर 575 रुपए से 458.75 रुपए तक पहुंचा दिया गया? आज भी यह 525.90 और 510.10 रुपए के बीच झूला  है। 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच तो इसे  575 रुपए से गिराकर 458.75 रुपए पर पटक दिया गया। इसके डेरिवेटिव के साथ भी यही हरकत हुई है। इस दरम्यान कंपनी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो उसके स्टॉक कोऔरऔर भी