आर्थिक ठहराव की शिकार अर्थव्यवस्था ने यूपीए सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यों के सामने याचक या नसीहत देने की मुद्रा में खड़ा कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि वे इस बात पर सावधानी से विचार करें कि किस तरह राज्य राष्ट्रीय मैन्यूफैक्चरिंग नीति का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। एक दशक में देश के सकल घरेलू उत्पादन में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के योगदान को 25औरऔर भी

देश के गली-मोहल्लों तक बिखरी 55 लाख किराना दुकानों के व्यापारी सड़कों पर उतरे। उनमें डर समा गया है कि मल्टी-ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) आने से उनका वजूद मिट सकता है। दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के खिलाफ गुरुवार को बुलाए गए भारत बंद में पांच करोड़ लोगों ने शिरकत की है। दावों की सत्यता नापने का कोई जरिया नहीं है। लेकिन यह सच है किऔरऔर भी

मुद्रास्फीति ऐसा गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है कि इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा तक बड़ी विनम्रता से बोलते हैं। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार इतने मुंह-फट हो गए हैं कि लगता ही नहीं कि उन्हें जनता या सरकार किसी की भी प्रतिक्रिया की कोई परवाह है। मंगलवार को पवार ने कहा कि सरकार फल और सब्जियों की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं है और वहऔरऔर भी