जीवन संविधान से मिला मूल अधिकार है। पर जब हमारे होने, न होने से किसी को कोई फर्क न पड़े तो हम जीते हुए भी मर जाते हैं। अगर आज करोड़ों लोग अप्रासंगिक हैं तो यह तंत्र ही संविधान-विरोधी है।और भीऔर भी