करते हम हैं और नाम दूसरों का लगा लेते हैं। इससे हम तो कमजोर के कमजोर रह जाते हैं और दूसरा भगवान और भगवान, सर्व-शक्तिमान बन जाता है। अन्यथा उनकी औकात कंकड़ से ज्यादा नहीं।और भीऔर भी