भावना-संभावना
सिर्फ भावनाओं से कुछ नहीं हो सकता। लेकिन भावनाओं के बिना भी कुछ नहीं हो सकता। भावनाएं उस लीवर का काम करती हैं जो कम बल से ज्यादा वजन उठाने की क्षमता देता है। भावनाएं ही हमें सक्रिय बनाती हैं। अन्यथा हम यूं ही पड़े रहें।और भीऔर भी
अनर्गल विचार
जख्मों पर मक्खियां और दिमाग में अनर्गल विचार तभी तक भिनभिनाते हैं, जब तक हम अचेत या अर्द्धनिद्रा की अवस्था में रहते हैं। जगते ही हमारा सचेत प्रतिरोध तंत्र सक्रिय हो जाता है तो घातक विचार व परजीवी भाग खड़े होते हैं।और भीऔर भी
स्वास्थ्य मंत्र
शरीर ही शरीर का सबसे बड़ा चिकित्सक है। बाहरी दवाएं या क्रियाएं तो शरीर के तत्वों को सक्रिय भर करती हैं। मूल इलाज तो शरीर की कोशिकाएं व तंतु करते हैं। सदा स्वस्थ रहने का केंद्रीय मंत्र यही है।और भीऔर भी
जीने का जश्न
मरना हमारी मजबूरी है। लेकिन जीना भी तो एक तरह की मजबूरी है। मरने की मजबूरी को हम बदल नहीं सकते। लेकिन जीने की मजबूरी को हम चाहें तो अपनी सक्रियता से जश्न में बदल सकते हैं।और भीऔर भी





