अनेक घोटालों पर विपक्ष के हमलों से घिरी सरकार ने एक अध्यादेश लाने का फैसला किया है जिसमें प्रधानमंत्री समेत लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एक लोकपाल बनाने की संभावना है। सूत्रों ने कहा कि सरकार 25 जनवरी से पहले अध्यादेश लाना चाहती है ताकि गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संदेश में इसका उल्लेख हो सके। सूत्रों ने यह भी कहा कि कैबिनेट की गुरुवार कोऔरऔर भी

विदा लेते साल 2010 के दौरान देश में भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामले सामने आए। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदी की तेज रफ्तार के साथ आगे बढती दिखाई दी। पहले राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में भ्रष्टाचार, फिर कॉरपोरेट जगत के लिये जनसंपर्क का काम करनेवाली नीरा राडिया के नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों के साथ बातचीत के टेप के सार्वजनिक होने और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से उठा तूफान। इन सब विवादों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फीसदीऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने की मांग पर डटा हुआ है। लोकसभा सचिवालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक संसद ने बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच के लिए चार बार जेपीसी का गठन किया है। 987 में बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के आरोपों की जांच के लिए पहली बार जेपीसी गठित की गई थी। इसके बाद हर्षद मेहता घोटाले की जांच के लिए 1992 में, केतन पारेख के घोटालेऔरऔर भी

एक तरफ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग पर बीजेपी की अगुआई में विपक्ष संसद से बाहर भी सरकार से भिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने इस मुद्दे पर विचार और सलाह मांगी है। श्री जोशी ने इस मुद्दे पर सोमवार, 27 दिसंबर को पीएसी की बैठक बुलाई है जिसमें लोगों कीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिए है कि वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 2001 से लेकर 2008 तक की अवधि की पूरी जांच करें। इस निर्देश के साथ ही एनडीए और यूपीए दोनों के शासनकाल की दूरसंचार नीतियां अब जांच के दायरे में आ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच में सरकारी खजाने को हुए नुकसानऔरऔर भी

टाटा उद्योग समूह के प्रमुख रतन टाटा ने अपना राजनीतिक रंग जाहिर कर दिया है। उन्होंने जहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस पार्टी का बचाव किया है, वहीं कहा है कि दूरसंचार नीति की खामियों के लिए बीजेपी भी दोषी है। उन्होंने मोबाइल फोन सेवा कंपनियों को रेडियो तरंगों के आवंटन में कथित घोटाले पर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के दौर में दखल करते हुए गुरुवार को खुलकर कहा कि जीएसएम मोबाइल सेवा कंपनियों की ओर से इसऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के शासन वाली एनडीए सरकार को भी घसीट लिया है और 2001 से ही जांच कराने की बात की है। इसके बाद लगता है कि राजनीतिक गतिरोध आखिरकार अब खत्म हो जाएगा। घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग ठंडी पड़ जाएगी। थोड़ी आस बनने लगी है कि संसद में कामकाज शुरू हो जाएगा और इस मसले पर बहस हो सकेगी। लेकिन बाजारऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी, सीबीआई का यह सुझाव खारिज कर दिया है कि उसे 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अपना फैसला और निर्देश सीलबंद कवर में जारी करना चाहिए। मामले पर गौर कर रही जस्टिस जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि य़ह फैसला खुली अदालत में आएगा और सीलबंद कवर में आदेश देना न्याय के हित में नहीं होगा। इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि इससे जबरदस्त कयासबाजी शुरूऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सरकार से शनिवार तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने जब यह कहा कि वह इस मामले में तमाम दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखने की स्थिति में हैं, तब न्यायाधीश जी एस सिंघवी और न्यायाधीश ए के गांगुली की पीठ ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए शनिवार तक का समय दिया। सुप्रीम कोर्ट जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यमऔरऔर भी

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को वर्ष 2008 में नई कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्रालय और विधि मंत्रालय की सलाह को नजरअंदाज करने का दोषी करार दिया है। मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में इस मामले में पेश कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार मंत्री के रूप में राजा के इस रवैये से सरकार को 1. 76 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व काऔरऔर भी