अकेले इनफोसिस में इतना दम है कि वह पूरे बाजार को दबाकर बैठा सकता है। शुक्रवार को यह बात साबित हो गई। सेंसेक्स 238.11 अंक गिर गया, जिसमें से 201.82 अंक का योगदान अकेले इनफोसिस का था। वह भी तब, जब सेंसेक्स में इनफोसिस का योगदान 8.18 फीसदी है। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान सबसे ज्यादा 9.44 फीसदी और आईटीसी का उससे कम 9.02 फीसदी है। इस तरह सेंसेक्स में वजन के मामले में इनफोसिस तीससेऔरऔर भी

निफ्टी सुबह के सत्र में 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) को पार नहीं कर पाया तो अधिकांश ट्रेडर शॉर्ट हो गए। लेकिन दो बजते-बजते बाजार ने कल जैसी चाल दिखानी शुरू कर दी और बहुत तेजी से कल के उच्च स्तर को मात देता हुआ 5244.60 तक बढ़ गया। आखिर में 0.70 फीसदी की बढ़त से साथ 5235.70 पर बंद हुआ है। इस बढ़त में ट्रेडरों के रुख बदलने का भी योगदान रहा क्योंकि ढाई बजेऔरऔर भी

आज, शुक्रवार को डॉलर की विनिमय दर दोपहर ढाई बजे के आसपास 49.44 रुपए तक चली गई। याद कीजिए कि दिसंबर 2011 में मैंने रुपए के बारे में क्या कहा था। मैंने कहा था कि रुपया जनवरी में ही डॉलर के सापेक्ष 50 से नीचे चला जाएगा, जबकि दिग्गज लोग लिखित रिपोर्ट जारी कर रहे थे कि वो 58 रुपए पर पहुंच जाएगा। यह सच महज रुपए पर ही नहीं, तमाम स्टॉक्स पर भी लागू हो जाताऔरऔर भी

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स, मूडीज और फिच जैसी रेटिंग एजेंसियों ने दुनिया भर में देशों से लेकर बैंकों तक को डाउनग्रेड करने का सिलसिला जारी रखा है तो हर तरफ निराशा ही निराश फैली गई है। इससे इन एजेंसियों को चाहे कुछ मिले या नहीं, लेकिन समूची दुनिया में निवेशकों को वित्तीय नुकसान जरूर हो रहा है। ध्यान दें कि ये वही रेटिंग एजेंसियां हैं जिन्हें 2007-08 में अमेरिका के सब-प्राइम संकट का भान तक नहीं हुआ थाऔरऔर भी

मैं यह कॉलम दशहरे की छुट्टी के दिन भी लिख रहा हूं तो इसकी दो वजहें हैं। एक तो यह कि मैं आपको दशहरे और आनेवाले त्योहारों की शुभकामनाएं देना चाहता हूं। दूसरा यह कि आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भले ही पूरा बाजार बेचने पर उतारू हो, मैं अब भी खरीद के पक्ष में मुस्तैदी से डटा हूं और मेरी रणनीति बदस्तूर हर गिरावट पर खरीदने की है। मैं अब भी मानता हूं कि बहुतऔरऔर भी

एक तरफ कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य गिरने की भविष्यवाणी हो रही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार आज ही मंत्रियों के समूह की बैठक के बाद डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ा सकती है। ऐसे माहौल में न जाने कौन-सा आशावाद काम कर गया कि करीब 1.90 लाख करोड़ रुपए के वोल्यूम के साथ बाजार आज बल्ले-बल्ले कर उठा। सेंसेक्स 513.19 अंक (2.89 फीसदी) बढ़कर 18,240.68 और निफ्टी 151.25 अंक (2.84 फीसदी) बढ़त लेकर 5471.25 परऔरऔर भी

अनिश्चितताओं का क्रम जारी है। बहुत से अनुत्तरित सवाल बाजार को डोलायमान किए हुए हैं। पिछले सेटलमेंट में सेंसेक्स 17,770 तक गिरने के बाद सुधरकर 18,600 पर आया ही था कि कुछ नई बुरी खबरों ने पटरा कर दिया। यकीनन, कच्चा तेल, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का बढ़ना जैसे पुराने मुद्दे बरकरार हैं। लेकिन इधर ग्रीस में फिर से उभरे ऋण संकट और अमेरिका में आई सुस्ती ने बाजार की मानसिकता को चोट पहुंचाई है। यहां तकऔरऔर भी

खराब आर्थिक आंकड़ों के चलते अमेरिकी बाजार कल गिर गया और ग्रीस को डाउनग्रेड कर दिया गया। इन दोनों ही घटनाओं का दुनिया के बाजारों पर पड़ा तो भारतीय बाजार भी आज सुबह गिरकर खुले। दिन भर ऊंच-नीच का क्रम चला और आखिकार सेंसेक्स 114.63 अंकों की गिरावट के साथ 18,494.18 और निफ्टी 41.65 अंकों की गिरावट के साथ 5550.35 पर बंद हुआ। लेकिन अगर दुनिया के बाजार न भी गिरे होते तो भारतीय बाजार गिर सकताऔरऔर भी

भारतीय बाजार ने दिखा दिया है कि यहां एक तरफ बहुत-सी कंपनियां मुश्किल में हैं और अपना धंधा बेचने को तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ बहुत-सी कंपनियां इस कदर संभावनाओं से भरी हैं कि उन्हें खरीदनेवालों की लाइन लगी है। ऑफिस स्टेशनरी बनानेवाली कैमलिन अपनी 50.3 फीसदी इक्विटी जापानी कंपनी कोकुयो को 365 करोड़ रुपए में बेचने में कामयाब हो गई। इससे पहले कनोरिया केमिकल्स अपना एक डिवीजन आदित्य बिड़ला समूह को बेच चुकी है। अब सबेरोऔरऔर भी

पूरा शेयर बाजार और यहां का तकरीबन हर कारोबारी इसी राय का है कि अब तो निफ्टी को 4800 तक जाना ही है। इसलिए हर कोई जहां भी संभव है, शॉर्ट सौदे ही कर रहा है। यहां तक कि विशेषज्ञ भी शॉर्ट करने के मौके तलाश रहे हैं। ब्लैकबेरी पर संदेश घुमाए जा रहे हैं कि फलां कंपनी बुरी है, उसे निकाल दो। दूसरा एसएमएस कहता है कि निफ्टी सबसे बुरे दौर की तरफ बढ़ रहा है।औरऔर भी