देश की राजनीति में सेवा भाव कब का खत्म हो चुका है। वो विशुद्ध रूप से धंधा बन चुकी है, वह भी जनधन की लूट का। इसे एक बार फिर साबित किया है गुजरात विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों ने। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की तरफ से सजाए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य की नई विधानसभा में 99 विधायक ऐसे हैं जो 2007 में भी विधायक थे। इनकी औसत संपत्ति बीते पांच सालों में 2.20 करोड़औरऔर भी

जब किसी सेवा या उद्योग का मूल मकसद मुनाफे को महत्तम करना हो जाए तो उससे इंसानी सरोकारों के कद्र की उम्मीद बेमानी है। मुनाफे की यह दौड़ भिखारी तक की जेब से दमड़ी निकाल लेती है तो बाकियों का लुटना एकदम स्वाभाविक है।और भीऔर भी

घटती विकास दर की हकीकत और आगे बढ़ जाने की उम्मीद के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देश का 81वां आम बजट शुक्रवार को संसद में पेश कर रहे हैं। आम नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की जा सकती है तो कॉरपोरेट क्षेत्र को लगता है कि एक्साइज ड्यूटी को 10 से 12 करके उनको पहले दी गई राहत वापस ले ली जाएगी। वहीं अर्थशास्त्रीऔरऔर भी

हमने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एफआईआई भारतीय बाजार को क्यों पसंद करते हैं। इसलिए कि वाजिब तंत्र के न होने और देश के रिटेल व छोटे निवेशकों को अहमियत न दिए जाने के चलते वे जब चाहें, बाजार को अपने हिसाब से नचा सकते हैं। आज समूची दुनिया के बाजारों में माहौल नकारात्मक था। दलाल स्ट्रीट भी बुरे दिन की उम्मीद किए बैठा था। लेकिन भारतीय बाजार में तेजी का चक्र चल गया।औरऔर भी

भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यस बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के खाताधारक मोबाइल फोन के जरिए एक-दूसरे के खाते में रकम भेज सकते हैं। इन सात बैंकों को यह इंटरबैंक मोबाइल पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) उपलब्ध करा रहा है। 31 मार्च 2011 तक वह बैंकों से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लेगा। लेकिन उसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर वह 25 पैसे लेगा। बैंकऔरऔर भी