कहते हैं कि दोस्त आईने जैसा होना चाहिए जो आपके हंसने पर हंसे और आपके रोने पर रोए। लेकिन ऐसे दोस्त से क्या फायदा जो आपका भ्रम नहीं मिटा सकता? आपको एक से अनेक नहीं बना सकता?और भीऔर भी

बचपन से लेकर बूढ़े होने तक हम हमेशा औरों पर हंसते हैं। लेकिन जब हम अपने पर हंसना सीख जाते हैं, तभी हमारा आत्म-विकास शुरू होता है। हां, अपने पर हंसने का मतलब आत्म-दया नहीं होता।और भीऔर भी