कंपनियों के शेयरों के भाव इस पर भी निर्भर करते हैं कि उसे चाहनेवाले कितने हैं। दिक्कत यह है कि हमारे यहां चाहनेवालों में निवेशक कम, ऑपरेटर ज्यादा हैं। लेकिन लंबे समय में ऑपरेटरों का करतब नहीं, कंपनी की असली ताकत ही चलती है। नहीं तो जिस पेंटामीडिया ग्राफिक्स को केतन पारेख ने फरवरी 2000 में 2275 रुपए तक उठा दिया था, वह आज 1.33 रुपए पर नहीं डोल रहा होता। इसलिए, ट्रेडिंग में सब चलता है,औरऔर भी

एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लाभ के धंधे में लगी बराबर लाभ कमानेवाली कंपनी है। 1934 में बनी 77 साल पुरानी कंपनी है। बिल्डिंग से जुड़े साजोसामान बनाती रही है। छत व दीवारों से लेकर दरवाजे व फ्लोरिंग तक। फाइबर सीमेंट बोर्ड (एफसीबी) से लेकर प्री-इंजीनियर्ड स्टील बिल्डिंग तक। एस्बेस्टस पर्यावरण के लिए खतरनाक है, विकसित देशों से उसे निकाला गया तो कंपनी ने उसका विकल्प एफसीबी के रूप में पेश कर दिया। घरेलू बाजार के साथ-साथ कंपनी निर्यात भीऔरऔर भी

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल इंडिया में अगले वित्त वर्ष के दौरान 10% हिस्सेदारी बेच सकती है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमें फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के लिए तैयार रहने को कहा गया है। फिलहाल ऑयल इंडिया की इक्विटी में सरकार की 78.4% हिस्सेदारी है। ऑयल इंडिया का विनिवेश सरकार द्वारा तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की 5% हिस्सेदारी बेचने के बाद किया जाएगा। ओएनजीसी के शेयरों की बिक्री दिसंबर में होनेऔरऔर भी

कुछ कंपनियों के बढ़ने से अर्थव्यवस्था बढ़ती है और कुछ कंपनियां अर्थव्यवस्था के बढ़ने से बढ़ती हैं। 1938 में डेनमार्क के दो इंजीनियरों हेनिक हॉक-लार्सन और सोरेन क्रिस्टियान टुब्रो द्वारा मुंबई में अपने नाम पर बनाई गई एल एंड टी दूसरी तरह की कंपनी है। हालांकि ये दोनों संस्थापक इतिहास के बस नाम भर रह गए हैं। इनका धेले भर का भी लेना देना अब एल एंड टी से नहीं है। यह पूरी तरह प्रोफेशनलों की तरफऔरऔर भी

पिछले बीस महीनों से कसते ब्याज दर के फंदे ने भले ही मुद्रास्फीति का बालबांका न किया हो, लेकिन औद्योगिक विकास का गला जरूर कस दिया है। खदानों, फैक्टरियों और सेवा क्षेत्र से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में मात्र 1.81 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि जानकारों का औसत अनुमान 3.5 फीसदी का था। यह सितंबर 2009 के बाद पिछले दो सालों की न्यूनतम औद्योगिक वृद्धि दर है। सितंबर 2010 में आईआईपीऔरऔर भी

गणनाओं में बहुत कुछ रखा है। लेकिन गिनतियों में कुछ नहीं रखा। आज दुनिया में करोड़ों लोग बमके पड़े हैं कि वे 11/11/11 का दिन जी रहे हैं। जर्मनी में तो लोग ज्यादा ही बावले होंगे क्योंकि आज 11 बजकर 11 मिनट पर वहां कई महीनों चलनेवाला कार्निवाल शुरू होगा तो उनके लिए पूरा क्रम 11/11/11/11/11 का बन गया है। लेकिन यह भी चक्र का एक दिन है जो जैसा आया है, वैसे ही चला जाएगा। फिरऔरऔर भी

सपरिवार तीन दिन की छुट्टियां। शहर से बाहर, पास के दूसरे शहर में। घरवालों ने मना किया कि इन दिनों में काम नहीं करना। फिर भी लैपटॉप व एमटीएस का कनेक्शन साथ ले गया कि दिन में घंटे-दो घंटे काम कर ही लेंगे। लेकिन एमटीएस का कनेक्शन लाख जतन के बावजूद जुड़ न सका और मेरी झल्लाहट एमटीएस के विज्ञापन की वो छवियां बढ़ाती रहीं जो उसकी स्पीड का महिमागान करती हैं। समझ में आ गया किऔरऔर भी

निर्यात की संदेहास्पद बढ़त जारी है। करीब तीन हफ्ते पहले हमारे वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने जो बताया था, आखिरकार आंकड़े उसकी तस्दीक करते हैं। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2011 में भारत का निर्यात 24.82 अरब डॉलर रहा है। यह सितंबर 2010 में हुए 18.20 अरब डॉलर के निर्यात से 36.36 फीसदी ज्यादा है। रुपए में यह वृद्धि 41.01 फीसदी निकलती है। लेकिन सरकार ने इस बात काऔरऔर भी

पिछले 18 महीनों में रिजर्व बैंक को 12 बार मौका मिला है और बारहों बार उसने ब्याज दरें बढ़ा दीं। मकसद था मुद्रास्फीति को काबू में लाना। लेकिन मुद्रास्फीति तो काबू में आने या पीछे मुड़ने का नाम ही नहीं ले रही। शुक्रवार को सरकार की तरफ से घोषित आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति की दर सितंबर महीने में 9.72 फीसदी रही है। यह जानकारों के अनुमान 9.70 फीसदी के एकदम करीबऔरऔर भी