साल 1992 में देश में हाइड्रोकार्बन की खोज व उत्पादन का काम निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और सेलन एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी तभी से धरती के भीतर से इन्हें निकालने का काम कर रही है। उसे शुरू में सरकार से गुजरात में खोजे गए तीन तेल क्षेत्रों – बकरोल, इंदरोरा व लोहार को विकसित करने का काम मिला। इसके बाद गुजरात में ही दो और तेल क्षेत्रों – ओग्नाज व कर्जीसन का काम भी मिल गया। कंपनीऔरऔर भी

अक्सर मुझे लगता है कि किसी खास शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह महज एक उकसावा भर होती है ताकि लोगों की दिलचस्पी बनी रहे और बाजार की खटर-पटर चलती रही। अनुमानों के पीछे कितना भी गणित गिनाया जाए, कुछ न कुछ पहलू छूट ही जाते हैं जिससे तीर निशाने पर नहीं लगता। जैसे साल भर पहले आज ही के दिन हमने फीनिक्स मिल्स पर एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले बताया था कि, “यहऔरऔर भी

मुंबई की लोकल ट्रेनों में गैंग बनाकर चलनेवाले यात्री जब करताल बजाकर गाना शुरू करते हैं तो समूचा कोच सिर पर उठा लेते हैं। पूरा माहौल विचित्र तरंग व उल्लास से भर जाता है। इतना ज्यादा कि कभी-कभी डर लगने लगता है। कुछ ऐसा ही हाल हमारे शेयर बाजार के डे-ट्रेडरों का है। इशारा मिला नहीं कि करताल बजाकर किसी शेयर को आकाश से पाताल या पाताल से आकाश तक पहुंचा देते हैं। हल्ला मचाते हैं क्विंटलऔरऔर भी

पहले घर एक-मंजिला हुआ करते थे। अब बहु-मंजिला होते हैं। पहले धन-दौलत सोने-चांदी के सिक्कों या बर्तनों के रूप में जमीन या दीवार में गाड़कर बचाई जाती है। अब लोग अपनी बचत बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या शेयरों जैसे अनाकार माध्यमों में लगाते हैं। पहले मुद्रास्फीति नहीं थी तो बचत जितना रखो, उतनी ही रहती थी। अब खोखली होती जाती है। इसलिए आप कमाकर बचाते हैं, यह पर्याप्त नहीं। आपकी बचत को भी कमा पड़ेगा। कम याऔरऔर भी

हीरो मोटोकॉर्प का शेयर खट-खटाखट बढ़ रहा है। 18 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो 1984.85 रुपए पर बंद हुआ था। अभी दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को मुहूर्त ट्रेडिंग में उसका बंद भाव 2105.65 रुपए रहा है। इस तरह छह कारोबारी सत्रों में वह छह फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। क्या बनता है इस स्टॉक में लाभ का योग? आइए समझने की कोशिश करते हैं। हीरो मोटोकॉर्प, देश की सबसे बड़ी मोटरसाइकिलऔरऔर भी

पिछले साल पावर ऑफ आइडियाज़ के विजेता के रूप में आईआईएम अहमदाबाद में हम जैसे चुनिंदा उद्यमियों को प्रोफेसर अरिंदम बनर्जी ने पढ़ाया था कि वैल्यू या मूल्य वो है जो कोई उपभोक्ता आपकी सेवा या उत्पाद के लिए देने को तैयार है। यह वो कीमत है जो वह अपना फायदा देखकर लागत के ऊपर आपको देता है। दूसरी बात यह कि अगर आपको अपने उद्यम का अंतर्निहित मूल्य पता करना हो तो ये देखिए कि कलऔरऔर भी

हिंदुस्तान ज़िंक पहले साल 2003 तक भारत सरकार की कंपनी हुआ करती थी। अब कबाड़ी से अरबपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी है। कंपनी की 845.06 करोड़ रुपए की इक्विटी में वेदांता समूह की हिस्सेदारी 64.92 फीसदी है, जबकि भारत सरकार के पास अब भी उसके 29.54 फीसदी शेयर हैं। फ्लोटिंग स्टॉक कम होने के बावजूद उसका शेयर बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं होता। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 155.25 रुपए (21 अप्रैल 2011) और न्यूनतमऔरऔर भी

केके बिड़ला समूह की कंपनी चंबल फर्टिलाइजर्स ने बुधवार को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए। कंपनी के निदेशक बोर्ड के कुछ फैसले भी किए। लेकिन इनमें से किसी बात से आहत होकर कंपनी का शेयर एक दिन में 13 फीसदी से ज्यादा गिर गया। एनएसई में इसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 13.02 फीसदी गिरकर 88.15 रुपए और बीएसई में 13.46 फीसदी गिरकर 87.45 रुपए पर बंद हुआ। इसकी दो स्पष्ट वजहें हैं। एक तोऔरऔर भी

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का धंधा एकदम सीधा सरल है। पहले हमारे बाप-दादा रिटायर होने के बाद ही घर बना पाते थे। लेकिन आज 30-35 साल के नौकरीपेशा लोग भी मुंबई व दिल्ली जैसे शहर में अपना घर बना ले रहे हैं तो इसे सुगम बनाने और इस ख्वाहिश को बिजनेस म़ॉडल बनाने का श्रेय एचडीएफसी के संस्थापक हंसमुख ठाकुरदास पारेख को जाता है। 1977 में उन्होंने आम मध्य वर्ग के लोगों को हाउसिंग फाइनेंस देनेऔरऔर भी