सरकार ने सुबह से शाम तक बाजार को बचाने की हरचंद कोशिश कर डाली। यही वजह है कि बीएसई सेंसेक्स की गिरावट 1.82 फीसदी तक सिमट गई। सेंसेक्स अभी 16,990.18 अंकों पर चौदह माह के न्यूनतम स्तर पर है। लेकिन आगे इसमें ज्यादा सेंध लगने की उम्मीद कम है। वित्त मंत्रालय के सलाहकार, योजना आयोग व उद्योग संगठनों से लेकर खुद वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि भारत की विकासगाथा अक्षुण्ण है और हमारी अर्थव्यवस्था केऔरऔर भी

एक तरफ भारतीय दवा कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें विदेशी अधिग्रहण से बचाया जाए। अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) तक ने सिफारिश की है कि दवा उद्यमों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 100 फीसदी से घटाकर 49 फीसदी कर दी जाए। दूसरी तरफ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दवा उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई को कहीं से कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। आहलूवालियाऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) में नया प्रबंध निदेशक चुनने की तैयारियां तेज हो गई हैं। पहली बार ऐसा लग रहा है कि परंपरा तोड़ते हुए आईएमएफ का नया मुखिया उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों से होगा और इस दौड़ में योजना आयोग के मोंटेक सिंह आहलूवालिया का नाम सबसे आगे है। अभी तक आईएमएफ के प्रमुख के पद पर यूरोपीय लोग ही रहे हैं। लेकिन गुरुवार को चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड ने साफ कह दिया कि डोमिनिक स्ट्रॉसऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने महीने पर पहले ही मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि मार्च 2011 में मुद्रास्फीति की दर 8 फीसदी रहेगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु तक कहते रहे थे कि मार्च अंत तक मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया जाएगा और यह 7 फीसदी पर आ जाएगी। लेकिन शुक्रवार को आए असली आंकड़ों के मुताबिक मार्च में मुद्रास्फीति की दर 8.98 फीसदी रही है। यह फरवरी महीने केऔरऔर भी

दिसंबर 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों को देखें तो दिसंबर 2009 की तुलना में यह केवल 1.6 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले बीस महीनों में औद्योगिक उत्पादन में हुई सबसे कम वृद्धि दर है। लेकिन अगर अप्रैल-दिसंबर 2010 के नौ महीनों की बात करें तो औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष 2009-10 की समान अवधि के बराबर 8.6 फीसदी है। रेटिंग एजेंसी केयर का कहना है कि इस दिसंबर में आईआईपी में कम वृद्धिऔरऔर भी

महंगाई खासकर पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के मूल्य बढ़ाने जाने के खिलाफ आज देश के ज्यादातर राज्यों में व्यावसायिक व आर्थिक गतिविधियां ठहर गईं। शेयर बाजार तक इससे अछूता नहीं रहा जहां कारोबार की कुल मात्रा घटकर महज 46426 करोड़ रुपए रह गई, जबकि वहां औसत कारोबार एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का होता रहा है। एनएसई में फ्यूचर एंड ऑप्शन (एफ एंड ओ) सेगमेंट में 35804 करोड़ का कारोबार हुआ और कैश सेगमेंट मेंऔरऔर भी