जन आंदोलनों से जरूरी सुधारों का माहौल भर बनता है, सुधार नहीं होते। सुधारों को पक्का करना है तो राजनीति में उतरना अपरिहार्य है। इसके बिना सारा मंथन झाग बनकर रह जाता है। गुबार जरूर निकल जाता है, लेकिन समाज में सुधरता कुछ नहीं।और भीऔर भी

झटपट कुछ नहीं मिलता। दही को कुछ समय तक मथने के बाद ही मक्खन निकलता है। कम से कम आधे घंटे की कसरत के बाद ही हमारे मस्तिष्क से तनाव को दूर करने वाले रसायन एन्डोर्फिन का रिसाव होता है।और भीऔर भी

जिस तरह दही को मथने से मक्खन निकलता है, उसी तरह मंत्रों का निरंतर जाप हमारे अंदर छिपी शक्तियों को बाहर निकालता है। मंत्र राम भी हो सकता है और मरा भी। यह वाक्य भी हो सकता है और विचार भी।और भीऔर भी