कृषि मंत्रालय के अनुसार इस बार धान और तिलहन के बोवाई रकबे में काफी वृद्धि हुई है। इससे लगता है कि चावल व खाद्य तेलों की सप्लाई ज्यादा रहेगी जिससे इनके दाम नीचे आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय ने बताया है कि राज्‍यों से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार 16 सितंबर ‍तक 376.77 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में धान की बोवाई हुई है। यह पिछले साल के मुकाबले 33.55 लाख हेक्‍टेयर अधि‍क है। पश्‍चि‍म बंगाल, बि‍हार, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश,औरऔर भी

रबी फसलों की बुवाई कहीं नमी की कमी से तो कहीं हाल की बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी के चलते अभी तक रबी सीजन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले अभी तक आधी भी नहीं हो पाई है। सबसे चिंताजनक स्थिति गेहूं बुवाई की है। इसका रकबा पिछले साल के मुकाबले सर्वाधिक 30 लाख हेक्टेयर तक पीछे है। बुवाई में विलंब होने से गेहूं की उत्पादकता पर विपरीत असर पडऩे का खतरा है। इसेऔरऔर भी

इस साल भी दालों की महंगाई घटने के आसार नहीं हैं क्योंकि इस साल पिछले साल की बनिस्बत कम क्षेत्रफल में दलहन की बोवाई की गई है। कृषि मंत्रालय को राज्यों से मिले आंकड़ों के अनुसार 2 जुलाई 2010 तक देश भर में 5.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलें बोई गई हैं, जबकि साल भर पहले 2 जुलाई 2009 तक दलहन का बोवाई रकबा 5.18 लाख हेक्टेयर था। इस तरह इस साल 3000 हेक्टेयर कम रकबेऔरऔर भी