सरकार ने बड़े स्पष्ट शब्दों में बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) से कहा कि उसे बीमा कंपनियों के बीच मची आत्मघाती होड़ की प्रवृत्ति को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। इधर कंपनियों में बाजार पकड़ने के चक्कर में कम प्रीमियम लेने की होड़ मची हुई है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में बुधवार को इरडा की 72वीं बोर्ड बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “वाजिब अंडरराइटिंग को सुनिश्चित करना और प्रीमियम में कटौतीऔरऔर भी

साल 2012 का पहला आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) बड़े ही धमाकेदार अंदाज में आ रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) का इश्यू बुधवार को खुलेगा और प्राइस-बैंड 860 से 1032 रुपए रखा गया है। लेकिन ग्रे मार्केट में अभी से इसमें ऊपरी मूल्य पर 350 से 400 रुपए का प्रीमियम चल रहा है। इससे आईपीओ के प्रति निवेशकों के रुझान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। निवेशकों को इस इश्यू से शुरुआत में हीऔरऔर भी

डाउ जोन्स में आई 165 अंकों की बढ़त और देश के गृहमंत्री पी चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में मिली राहत ने आज बाजार के बढ़कर खुलने की जमीन तैयार कर दी थी। लेकिन जैसी कि मुझे उम्मीद थी, वो खुद को टिकाए नहीं रख सका। निफ्टी 5390.05 तक जाकर नीचे उतर आया और 0.67 की बढ़त के साथ 5361.65 पर बंद हुआ। जब हर तरफ से बुरी खबरें आ रही थी, तब बाजार के सारे लोगऔरऔर भी

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के तहत जारी स्मार्ट कार्डों की संख्या 31 दिसंबर 2011 तक 2.57 करोड़ पर पहुंच चुकी है। इससे 29.25 लाख से ज्‍यादा लोग अस्‍पताल में भर्ती होने की सुविधा ले चुके थे। इस योजना को गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए अक्‍टूबर 2007 को शुरू किया गया था और अप्रैल 2008 से अमल में लाया गया। इसमें सालाना प्रीमियम का 75% भारत सरकार देती है, जबकि 25% राज्य सरकारें देती हैं।औरऔर भी

सिंगल प्रीमियम पॉलिसी को छोड़ दें तो किसी भी जीवन बीमा पॉलिसी में जैसे ही आप प्रीमियम देना बंद करते हैं, आपका बीमा कवर खत्म हो जाता है। कंपनियां अक्सर यूलिप स्कीमों में यह बात छिपाती हैं। एजेंट कहते हैं कि पांच साल के बाद आप प्रीमियम न दें तब भी आपकी पॉलिसी चालू रहेगी। लेकिन तब आपको केवल फंड वैल्यू मिलती है और सम-एश्योर्ड शून्य हो जाता है। कोई संदेह हो तो अपने पॉलिसी दस्तावेज पढ़औरऔर भी

भारत का बीमा बाजार पिछले दस सालों के काफी तेजी से बढ़ा है और अब यह दुनिया में 11वे नंबर पर आ गया है। लेकिन चीन इससे पांच स्थान ऊपर छठे नंबर पर है। यह बात अंतरराष्ट्रीय कंपनी स्विस रे की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। एक हफ्ते पहले 6 जुलाई को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी व फ्रांस इसी क्रम में दुनिया के सबसे बड़े पांच बीमा बाजार बने हुए हैं।औरऔर भी

आम लोगों के लिए कल्याण योजनाओं का विस्तार करने के क्रम में सरकार ने घरेलू श्रमिकों को भी स्वास्थ्य बीमा के तहत लाए जाने को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में देश के पंजीकृत 47.50 लाख घरेलू श्रमिकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना योजना के तहत लाए जाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। इन श्रमिकों में ज्यादातर घरों में काम करनेवाली महिलाएं हैं। बैठक केऔरऔर भी

जो बात आप में से बहुतों ने नोट करने के बावजूद अनदेखी कर दी होगी, वो अब केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की भी नजर में आ गई है और वह इसके प्रति काफी गंभीर है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बहुतेरी शाखाओं में तय सीमा वाले प्रीमियम की रसीदों पर रेवेन्यू स्टैम्प या रसीदी टिकट नहीं लगाया जाता जिससे सरकारी खजाने को हर साल भारी नुकसान हो रहा है। बताऔरऔर भी

बाजार का जो भी खेल है, यहां अपग्रेड और डाउनग्रेड गलत वक्त पर होते हैं। हमने एसकेएस माइक्रो फाइनेंस को 800 रुपए पर डाउगग्रेड किया था और अब देखिए उसका हश्र क्या है। हमने एसबीआई को 3500 रुपए पर डाउनग्रेड किया था, बाजार अब कर रहा है। हमने मुथूत फाइनेंस के बारे में नकारात्मक राय रखी और लिस्टिंग पर उसका हाल-बेहाल सामने आ गया. है। हमें यकीन है कि यह स्टॉक घटकर 123 रुपए तक आ जाएगाऔरऔर भी

पिछले दिनों कानून व व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को मुंबई के पास समुद्री सीमा में कुछ कुख्यात सोमालिया डाकुओं या जल-दस्युओं को धर दबोचने में बड़ी कामयाबी मिली। इन डाकुओं से पूछताछ में कई खतरनाक रहस्य उजागर हुए हैं। इसके अलावा पिछले साल दिसंबर में भी एक भारतीय जहाज जल-दस्युओं के शिकंजे में फंस गया था। बढ़ता आतंक: गत दिनों भी एक भारतीय कंपनी का मालवाहक जहाज अदन की खाड़ी से गुजरते हुए कुख्यात सोमालियाई डाकुओं केऔरऔर भी