देश में सरकारी प्रतिभूतियों (बांडों) का बाजार पूरी तरह बनावटी है और सही अर्थों में यह बाजार है ही नहीं। यह कहना क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक चेयरमैन डॉ. आर एच पाटिल का। डॉ. पाटिल देश में ऋण बाजार के पुरोधा माने जाते हैं। कॉरपोरेट ऋण पर उनकी अध्यक्षता में बनी समिति दिसंबर 2005 में अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंप चुकी है जिसकी सिफारिशों पर अमल की बात बराबर रिजर्व बैंक व सेबी की तरफऔरऔर भी

नाफेड के लिए 1200 करोड़ रुपए के राहत पैकेज को शायद अभी अमली जामा नहीं पहनाया जा सके क्योंकि कृषि मंत्रालय को इसके चेयरमैन पद पर बिजेंदर सिंह के बने रहने पर आपत्ति है। सिंह पर वित्तीय अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप हैं। पहले तय हुआ था कि सरकार 51 फीसदी हिस्सेदारी के बदले नाफेड को 1200 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दे सकती है। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सिंह को निजी फर्मों को 4000औरऔर भी