यह बजट किसके लिए है? आम के लिए, खास के लिए या बाजार के लिए! अगर प्रतिक्रियाओं के लिहाज से देखा जाए तो इनमें से किसी के लिए भी नहीं। आम आदमी परेशान हैं कि उसे बमुश्किल से मुद्रास्फीति की मार के बराबर कर रियायत मिली है। खास लोगों को कहना था कि वित्त मंत्री को राजकोषीय मजबूती के लिए जो ठोस उपाय करने थे, वैसा कोई भी साहसिक कदम उन्होंने नहीं उठाया है। उन्होंने दस मेंऔरऔर भी

बाजार को कल ही आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के शानदार आंकड़ों के बाद 5600 के पार चला जाना चाहिए था। लेकिन भारतीय बाजार ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि वह कुछ ट्रेडरों और एफआईआई के कार्टेल के शिकंजे में है जो फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में बाजार को जब चाहें, मनमर्जी से नचा सकते हैं। रिटेल निवेशक आईआईपी के घोषित होने के बाद उत्साहित होकर खरीद बढ़ाने लगे तो इस कार्टेल ने निफ्टी पर चोटकरऔरऔर भी

निफ्टी आज 10 से 12 बजे के बीच दो बार 5600 के एकदम करीब चला गया। लेकिन 5592.90 के बाद उसे ऊपर खींच पाना मुश्किल हो गया। जैसा कि मुझे कल ही अंदेशा था और मैंने लिखा भी था कि निफ्टी में 5620 का स्तर आने से पहले मंदड़िये हमले पर उतर आए। उनकी बिकवाली के चलते बाजार दो बजे के आसपास गिरावट का शिकार हो गया, जबकि पहले वह बराबर बढ़त लेकर चल रहा था। ढाईऔरऔर भी

इनफोसिस ने भारत के बारे में धुरंधरों का नजरिया बदल दिया है। जानीमानी निवेश व ब्रोकिंग फर्म सीएलएसए और कुछ दूसरे विश्लेषकों ने भारतीय बाजार को डाउनग्रेड कर दिया है। लेकिन जान लें कि इनफोसिस में बिकवाली इसलिए नहीं हुई कि उसके नतीजे उम्मीद से कमतर थे, बल्कि इसकी कुछ दूसरी वजहें थीं। इसके फ्यूचर्स में औकात से ज्यादा कर लिए गए सौदे काटे जा रहे हैं। अभी तो हम इनफोसिस में अच्छा-खासा मूल्य देख रहे हैंऔरऔर भी

निवेश की दुनिया की जानीमानी फर्म नोमुरा सिक्यूरिटीज के प्रतिनिधि ने आज ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि वे भारतीय बाजार के प्रति अब न इधर की, न उधर की, बस बीच की राय रखते हैं। सही बात है कि सेंसेक्स का 18,000 पर पहुंचना एफआईआई तक के बीच बाजार के महंगा होने की थोड़ी झुरझुरी पैदा कर सकता है। लेकिन मेरा यकीन मानिए। एफआईआई ने केवल जुलाई महीने में बाजार में 16,000 करोड़औरऔर भी