इनफोसिस देश की इकलौती कंपनी है जिसका करीब 35% मालिकाना हक उसके कर्मचारियों के पास है। कंपनी की कुल 287.09 करोड़ रुपए की इक्विटी पूंजी में से उसके मूल संस्थापक नारायण मूर्ति, उनकी पत्नी, बेटी व बेटे का हिस्सा मात्र 4.47% हैं। इसमें से सबसे ज्यादा 1.41% शेयर उनकी बेटी अक्षता मूर्ति और सबसे कम 0.41% शेयर खुद उनके पास हैं। एफआईआई ने कंपनी के 36.88% शेयर खरीद रखे हैं, जबकि घरेलू संस्थानों (डीआईआई) ने 9.84%। कंपनीऔरऔर भी

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस टेक्नोलॉजीज का शेयर 15 अप्रैल को सालाना नतीजों की घोषणा के बाद से लगातार गिरते-गिरते 2850 रुपए पर आ चुका है। लेकिन बाजार के रुझान और मूड को देखें तो अब इसमें ज्यादा गिरने की गुंजाइश नहीं है। यह इसे खरीदने का अच्छा मौका है। इस बीच कंपनी ने बताया है कि वह चीन के शांघाई शहर में 12.5 से 15 करोड़ डॉलर के निवेश से एक नयाऔरऔर भी

ठीक साल भर पहले जब पिरामल हेल्थकेयर ने अपनी फार्मा बिजनेस एबॉट लैब्स को बेची थी तो पिरामल समूह के चेयरमैन अजय पिरामल ने बड़े भावुक अंदाज में कहा था कि उन्हें लग रहा है जैसे वे पाल-पोसकर बड़ी की गई बेटी को ससुराल भेज रहे हों। अब उसी तरह की बात इनफोसिस के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने कही है। उन्होंने कहा है कि इनफोसिस छोड़ना बिल्कुल उसी तरह है जैसे मां-बाप अपनी बेटी कीऔरऔर भी

टीसीएस के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस टेक्नोलॉजीज ने नए वित्त वर्ष 2011-12 के लिए उम्मीद के अनुरूप डॉलर में आय के 18 से 20 फीसदी बढ़ जाने का अनुमान पेश किया, वित्त वर्ष 2010-11 में उसकी आय भी 20.9 फीसदी बढ़ गई है। फिर भी कुछ ऐसी चीजें हो गईं जो बाजार को रास नहीं आईं। सो, उसका शेयर शुक्रवार को बीएसई में 9.59 फीसदी गिरकर 2988.80 रुपए और एनएसई मेंऔरऔर भी

एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के रणनीतिकार और रिसर्च प्रमुख जगन्नाधम तुनगुंटला पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स पर कब्जा जमाने की कोशिशों को लेकर बड़ा मजेदार सवाल उठाते हैं कि आखिर इन पत्नी (Patni) का पति कौन होगा? जवाब आ चुका है, हालांकि इसकी पुष्टि होनी बाकी है। खबरों के मुताबिक नास्डैक में लिस्टेड कंपनी आईगेट पटनी को 100 करोड़ डॉलर में खरीदने जा रही है। कितना अजीब संयोग है कि पटनी के एक पूर्व कर्मचारी एन आर नारायण मूर्ति नेऔरऔर भी

अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनना आसान है। लेकिन अपने बारे में खबर लिखना बहुत मुश्किल है। खबर तो दूसरों को आपके बारे में लिखनी चाहिए। लेकिन आज की अगड़म-बगड़म और शोर-शराबे में खबर लिखनेवाले इतने उलझे हैं कि वे ज्यादा मिर्च, ज्यादा नमक और ज्यादा चीनी खाकर बेस्वाद हो चुकी जीभ को तर करनेवालों को भी मात देने लगे हैं। इसलिए अपनी खबर आप तक पहुंचाना मेरा फर्ज और मजबूरी दोनों बन जाता है। वैसे, भी आजऔरऔर भी

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने सवाल उठाया है कि चीन ने अपनी सस्ती मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर दुनिया के तमाम देशों में औसत नौकरियों के मौके खत्म कर दिए है, लेकिन उसके खिलाफ कहीं शोर नहीं होता। जबकि भारत ने आउटसोर्सिंग के काम से नौकरियों के सीमित अवसर ही खत्म किए हैं, लेकिन भारत के खिलाफ खूब हल्ला मचाया जा रहा है। नारायण मूर्ति मंगलवारऔरऔर भी

भले ही देश के सबसे पुराने उद्योग समूह टाटा में रतन टाटा के उत्तराधिकारी की तलाश जोरशोर से शुरू हो चुकी हो और देश की प्रमुख आईटी कंपनी इनफोसिस तक में नारायण मूर्ति की जगह भरने की कोशिशें तेज हो गई हों, लेकिन तीन चौथाई से ज्यादा भारतीय कंपनियों में अगला सीईओ कौन होगा, इस पर चर्चा तक नहीं होती। यह निष्कर्ष है अमेरिकी सलाहकार फर्म बेन एंड कंपनी के एक ताजा सर्वेक्षण का। लंदन से प्रकाशितऔरऔर भी