।।चंद्रभूषण।।* अट्ठारह साल के एक नौजवान ने अपने पिता को लिखे पत्र में बड़े उत्साह से अपने रिसर्च टॉपिक के बारे में बताया। जवाब में भेजी गई चिट्ठी में पिता ने लिखा, “बेटे, समानांतर रेखाओं के फेरे में तो तुम हरगिज न पड़ना। यह रास्ता मेरे लिए अच्छी तरह जाना-बूझा है। न जाने कितनी अंतहीन रातें जागकर मैंने इसकी थाह लेने की कोशिश की है लेकिन मेरे जीवन की सारी रोशनी, मेरी सारी खुशी इस प्रयास मेंऔरऔर भी

जितना बड़ा जोखिम, उतना बड़ा बीमा। दुनिया ने 1 सितंबर की तारीख को अब तक का सबसे बड़ा जोखिम झेला है क्योंकि दूसरा विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 को शुरू हुआ था। लेकिन देश में भी 1 सितंबर की तारीख और बीमा उद्योग के बीच गहरा रिश्ता है। 1 सितंबर 2000 को भारतीय बीमा उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खोला गया। 1 सितंबर 2010 से यूलिप के कायाकल्प के लिए इरडा के नए दिशानिर्देश लागू हुए हैं।औरऔर भी