दौर ही तो है!
मेहनत का मोल नहीं, प्रतिभा का भाव नहीं। ठगों की बस्ती है। ठगी का दौर है। कोई सीधे-सीधे ठग रहा है तो कोई घुमाकर। सारा कुछ डर और लालच के हमारे शाश्वत भाव का फायदा उठाकर किया जा रहा है। लेकिन यह भी तो एक दौर है। बीत जाएगा।और भीऔर भी
सबक मुसीबत के
जिंदगी के हाईवे पर मुसीबतें इसलिए नहीं आतीं कि आप लस्त होकर चलना ही बंद कर लें, बल्कि मुसीबतों का हर दौर आपको वह मौका उपलब्ध कराता है जब आप ठहरकर अब तक के सफर की समीक्षा और आगे की यात्रा की तैयारी कर सकते हैं।और भीऔर भी
मुनाफे का फेर
काश! हम उतना ही पैदा करते, जितना वाकई आवश्यक है। लेकिन मुनाफा बढ़ाते जाने के इस दौर में अनावश्यक चीजें बनाई और ग्राहकों के गले उतारी जा रही हैं। इससे वो प्राकृतिक संपदा छीझती जा रही है जो फिर कभी वापस नहीं आएगी।और भीऔर भी
ज़माना सपनों का
आज का जमाना ही सपने देखने-दिखाने और उन्हें पूरा करने का जमाना है। अगर आप अपने सपने के लिए काम नहीं करते तो दूसरों के सपनों के लिए काम करते हैं। अपने या दूसरों के लिए? फैसला आपका है।और भीऔर भी


