देश के ग्रामीण अंचलों में सूद पर सूद लेने का महाजनी चलन अब भी जारी है। कई जगह तो इस काम में कांग्रेस और बीजेपी जैसी स्थापित पार्टियों के सांसद व विधायक तक लगे हुए हैं। लेकिन शहरी इलाकों में बैंक भी इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। वे इसके लिए सूद पर सूद नहीं, चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के अंतर का फायदा उठाकर ग्राहकों की जेब ढीली कर रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहलेऔरऔर भी

रिजर्व बैंक एक तरफ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की सेहत को लेकर परेशान है, वहीं हमारे बैंक इस क्षेत्र को जमकर कर्ज रहे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के वाणिज्यिक बैंकों ने जुलाई 2011 में एनबीएफसी को पिछली जुलाई की तुलना में 55.6 फीसदी ज्यादा कर्ज दिया है, जबकि पिछली बार इस क्षेत्र को दिए गए कर्ज में वृद्धि केवल 10.9 फीसदी थी। एनबीएफसी को दिए गए बैंक ऋण की मात्रा इस समयऔरऔर भी

इंटरनेट सुरक्षा में सेंध का एक बड़ा मामला सामने आया है। अमेरिका में बोस्टन से जारी खबर में आशंका जताई गई है कि एक हैकर सोनी के ऑनलाइन प्लेस्टेशन वीडियो गेम नेटवर्क में घुसकर करीब 7.7 करोड़ ग्राहकों की निजी सूचनाएं उड़ा ले गया है। इसमें ऐसे ग्राहकों की क्रेडिट कार्ड संबंधी सूचनाएं भी शामिल हैं। सोनी के वरिष्ठ निदेशक (कारपोरेट संचार और सोशल मीडिया) पैट्रिक सेबोल्ड ने एक ब्लॉग में लिखा है कि ‘एक अनधिकृत व्यक्ति’औरऔर भी

कई सालों की मशक्कत के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन (एनपीसीआई) ने प्रस्तावित विशिष्ट इंडिया कार्ड को अंतिम रूप दे दिया है जो व्यावसायिक रूप से लांच किए जाने के बाद वीजा व मास्टरकार्ड जैसी तुरंत भुगतान फर्मों की जगह लेगा। एनपीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया कि प्रस्तावित कार्ड का नाम Rupay (रूपे) होगा। कंपनी की बोर्ड बैठक में इसके लोगो को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। उल्लेखनीय हैऔरऔर भी

औसत भारतीय अब भी कर्ज लेने से परहेज करता है। हम अपनी कुल सालाना खरीद का बमुश्किल एक फीसदी हिस्सा क्रेडिट कार्ड से पूरा करते हैं, जबकि दुनिया का औसत 12 फीसदी का है। दूसरी तरफ बैंकों की पहुंच ग्रामीण आबादी तक नहीं बन पाई है। गावों में उधार लेनेवाले 90 फीसदी से ज्यादा लोग स्थानीय सूदखोरों का सहारा लेते हैं। बैंक भी गांवों को उपेक्षित करते हैं। साल 2009 तक के आंकड़ों के अनुसार बैंकों नेऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों और गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को हिदायत दी है कि वे क्रेडिट कार्ड के कामकाज के बारे में बिना किसी लाग-लपेट के तय दिशानिर्देशों का पालन करें, नहीं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना लगाना भी शामिल है। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बाकायदा एक अधिसूचना जारी कर यह निर्देश दिया है। असल में इधर रिजर्व बैंक से लेकर बैंकिंग ओम्बड्समैन के कार्यालयों को क्रेडिट कार्डधारकों से बराबर शिकायतें मिलऔरऔर भी

देश की कुल 6 लाख बसाहटों में से बमुश्किल 30,000 या महज 5 फीसदी में किसी वाणिज्यिक बैंक की शाखा है। तकरीबन 40 फीसदी भारतीयों के पास ही बैंक खाता है। यह अनुपात देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में तो और भी ज्यादा कम है। ऐसे लोगों की संख्या जिनके पास किसी न किसी किस्म का जीवन बीमा कवर है, केवल 10 फीसदी है। साधारण बीमा की बात करें तो यह सुविधा लेनेवालों का अनुपात एक से भीऔरऔर भी