मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रफ्तर से बढ़ा है। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रही किसी भी धीमेपन के डर को दरकिनार कर दिया है। इससे उन आलोचनाओं पर भी लगाम लग सकती है जिनमें कहा जा रहा है था कि रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को थामने के उत्साह में आर्थिक विकास को दांव पर लगा दिया है। मार्च 2011 में फैक्ट्रियों, खदानों व सेवा क्षेत्र में उत्पादन साल भर पहलेऔरऔर भी

दिसंबर 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों को देखें तो दिसंबर 2009 की तुलना में यह केवल 1.6 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले बीस महीनों में औद्योगिक उत्पादन में हुई सबसे कम वृद्धि दर है। लेकिन अगर अप्रैल-दिसंबर 2010 के नौ महीनों की बात करें तो औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष 2009-10 की समान अवधि के बराबर 8.6 फीसदी है। रेटिंग एजेंसी केयर का कहना है कि इस दिसंबर में आईआईपी में कम वृद्धिऔरऔर भी