हर साल के बजट में सरकार कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाती जा रही है और पिछले कई सालों से वास्तव में बांटा गया कृषि ऋण घोषित लक्ष्य से ज्यादा रहा है। इस साल के बजट में भी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने चालू वित्त वर्ष 2012-13 के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाकर 5.75 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। बीते वित्त वर्ष 2011-12 में यह लक्ष्य 4.75 लाख करोड़ रुपए का था जिसमें से दिसंबर 2011औरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर अक्टूबर से दिसंबर 2011 की तिमाही में घटकर 6.1 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले करीब तीन सालों (11 तिमाहियों) में किसी भी तिमाही की सबसे कम आर्थिक विकास दर है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 6.9 फीसदी और उससे पहले जून तिमाही में 7.7 फीसदी रही थी। आर्थिक विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह इस साल अबऔरऔर भी

माना जाता है कि किसानों को सरकार मुफ्त में बिजली देती है। लेकिन योजना आयोग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों में बिजली की दरें सबसे ज्यादा कृषि व सिंचाई में और सबसे कम व्यावसायिक व औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ाई गई हैं। यही नहीं, पिछले पांच सालों में कई राज्यों में खेतिहर ग्राहकों के लिए बिजली की दरें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। किसानों के लिए सबसे ज्यादा महंगी बिजली पंजाब में हुईऔरऔर भी

साल भर पहले जब सरकार ने घोषित किया था कि वह राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 5.5 फीसदी तक सीमित रखेगी, तब उसका यह लक्ष्य और दावा बड़ा अतार्किक लग रहा था। लेकिन 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से मिले अतिरिक्त धन की बदौलत सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 फीसदी तक लाने में कामयाब रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की यह एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि आस्तियों को बेचना घाटे को पूराऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 का बजट देश और देश की अर्थव्यवस्था के हित में है। शेयर बाजार अभी इसे अपने हित में मानता है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आखिरकार अर्थव्यवस्था ही बाजार की भी मजबूती का आधार बनती है। फिर आज अगर बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक उछला है तो जरूर बाजार ने भी इसका अहसास किया है। हालांकि सेंसेक्स बाद में केवल 122.49 अंकों या 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 17,823.40 परऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीजी) में वृद्धि की दर अगले वित्त वर्ष 2011-12 में 8.8 फीसदी रह सकती है और इसके चालू वित्त वर्ष के आर्थिक विकास दर से कम रहने का अनुमान है। आर्थिक शोध संस्थान सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकनोमी (सीएमआईई) ने यह अनुमान जताया है। उसने चालू वित्त वर्ष 2010-11 के लिए आर्थिक वृद्धि 9.2 फीसदी रहने की संभावना जताई है। सीएमआईई ने कहा कि वित्त वर्ष 2010-11 में कृषिऔरऔर भी