इस समय देश में व्यक्तिगत आयकर देनेवाले लोग कुल तीन करोड़ हैं। इनमें से 2.02 करोड़ की सालाना आय दो लाख रुपए तक है। 56.73 लाख लोगों की सालाना आय दो से चार लाख रुपए है। चार से दस लाख रुपए तक सालाना आय के करदाता 36.07 लाख हैं। दस से बीस लाख कमानेवालों की संख्या 3.35 लाख है। साल में 20 लाख रुपए से ज्यादा कमानेवालों की संख्या केवल 1.85 लाख है। इन्होंने बीते वित्त वर्षऔरऔर भी

भारत सरकार का प्राथमिक घाटा चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से सितंबर तक के पहले छह महीनों में 1,58,311 करोड़ रुपए रहा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के 12 महीनों के लिए बजट में इसका निर्धारित लक्ष्य 1,44,831 करोड़ रुपए का है। इस तरह साल के छह महीने में ही देश का प्राथमिक घाटा पूरे साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का 109.3 फीसदी हो चुका है। यह इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि पिछले वित्तऔरऔर भी

मानसून की सही व अच्छी शुरूआत, लेकिन आर्थिक विकास दर में कमी, कंपनियों के लाभार्जन का सिकुड़ना और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बैंकों के ऋण-प्रवाह में कमी। यह सब ऐसी बातें हैं जिनके सम्मिलित प्रभाव से हो सकता है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक दे। हालांकि चीन सीआरआर (केंद्रीय बैंक के पास बैंकों द्वारा अनिवार्य रूप से रखा जानेवाला कैश) में एक और वृद्धि करनेवाला है। लेकिन भारत में ब्याज दर कीऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में तय लक्ष्य से भी अधिक कर-वसूली के लिए आयकर विभाग की पीठ थपथपाई और कहा कि 7.90 लाख करोड़ रुपए की अप्रत्याशित कर वसूली करके विभाग ने देश को वित्तीय मजबूती के रास्ते पर लाने में मदद दी है। सरकार ने 2010-11 में 7.90 लाख करोड़ रुपए का कर संग्रह किया जबकि 74,000 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया। वित्त मंत्री ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी:औरऔर भी