कर्ता बाहर का नहीं, अंदर का ही कोई जीव-अजीव है। संतुलन हासिल करने के क्रम में सचेत-अचेत कर्म ही हर घटना के कारक हैं। बाकी सब समझने की सुविधा के लिए हम जैसे इंसानों द्वारा गढ़े गए पुतले हैं।और भीऔर भी

यहां किसी कर्ता की जरूरत नहीं। ऑटो-पायलट मोड में है सब कुछ। आज से नहीं, जब से सृष्टि बनी, तब से। संरचनाएं जटिल होती गईं। नए भाव बनते गए। लेकिन चलता रहा ऑटो-पायलट मोड।और भीऔर भी

जब आप खुद को कर्ता नहीं, निमित्त मानते हैं तो और कुछ हो या न हो, तमाम झंझट व तनाव से बच जाते हैं। आपके अंदर एक तरह की तटस्थता आ जाती है और आप अपना काम ज्यादा शिद्दत से कर पाते हैं।और भीऔर भी