हम हिंदुस्तानी जुगाड़ तंत्र में बहुत उस्ताद हैं। फाइनेंस और शेयर बाज़ार दुनिया में उद्योगीकरण में मदद और उसके फल में सबकी भागीदारी के लिए विकसित हुए। लेकिन हमने उसे भोलेभाले अनजान लोगों को लूटने का ज़रिया बना लिया। इसलिए शेयर बाज़ार की ठगनेवाली छवि हवा से नहीं बनी है। पिछले हफ्ते हमारे एक सुधी पाठक के एस गुप्ता जी ने एक किस्सा लिख भेजा कि शेयर बाज़ार में पैसा कैसे डूबता है। वो किस्सा यूं है…औरऔर भी

ई-मेल और मोबाइल फोन के आज के युग से काफी पहले सत्रहवीं सदी के शुरू में भारत में एक हिस्से से दूरे हिस्से तक कबूतरों, नंगे पांव दौड़नेवाले वाहकों और बैलगाड़ियों के जरिए संदेश पहुंचाए जाते थे। भारतीय डाक व्यवस्था के तमाम पहलुओं पर स्टीव बोर्गिया ने एक नई किताब ‘पिजंस टू पोस्ट’ लिखी है। यह किताब लगभग दो हजार साल पुराने भारतीय डाक तंत्र का इतिहास बताती है। इसमें पुराने डाकखानों, सैकड़ों साल पुराने जीर्ण शीर्णऔरऔर भी