सुप्रीम कोर्ट ने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को सहारा समूह की दो कंपनियों के ओएफसीडी इश्यू की तहकीकात जारी रखने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि हो सकता है कि निवेशकों को इन उत्पादों (डिबेंचरों) का कोई आगा-पीछा ही न मालूम हो और वे बाद में खुद को हर्षद मेहता जैसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ महूसस करें। कोर्ट ने गुरुवार को सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के ओएफसीडीऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया रीयल एस्टेट को निर्देश दिया है कि वह ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) स्कीम के आवेदन का फॉर्मैट और कंपनी की तरफ से धन जुटानेवाले अपने सभी मान्यताप्राप्त एजेंटों की सूची उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा परिवार की इस कंपनी को यह निर्देश तब दिया जब कंपनी ने कहा कि वह निवेशकों द्वारा दिए गए गलत पतों व अन्य ब्यौरों के लिए जवाबदेह नहीं है। प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडिया कीऔरऔर भी