शेयर बाज़ार दिमागदार शेरों के लिए है, कमज़ोर दिलवालों के लिए नहीं। यहां जो घबराया, समझो गया। जो डरा सो मरा। इसीलिए कहते हैं कि शेयर बाज़ार में अच्छे दिमाग से भी ज्यादा अहम है अच्छा नर्वस सिस्टम। अर्थव्यवस्था में जितना भी नया मूल्य बनता है, उसमें हिस्सेदारी का बाज़ार है यह। यहां लोकतंत्र है बराबर के जानकारों का। पर सूचनाओं और ज्ञान की विषमता इसे भीड़तंत्र बना देती है। देखें, क्या रहेगी आज बाज़ार की दशा-दिशा….औरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था प्राकृतिक आपदा या आतंकवादी हमले से होनेवाली व्यापक तबाही ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते तक झेल सकती है क्योंकि सरकारों या उद्योग-धंधों ने ऐसी अनहोनी के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर रखी है। यह आकलन है दुनिया के एक प्रतिष्ठित चिंतन केंद्र, चैथम हाउस का। चैथम हाउस लंदन का एक संस्थान है जो अंतरराष्ट्रीय मसलों से संबंधित नीतियों पर नजर रखता है। दुनिया भर के नीति-नियामकों के बीच इसकी बड़ी साख है। चैथम हाउस नेऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड का मानना है कि यूरो मुद्रा का ‘अंत’ इस साल होने के कोई आसार नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि जल्दी ही आईएमएफ की जारी होनेवाली रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर सितंबर में घोषित 4 फीसदी के अनुमान से कम रहेगी। फिलहाल दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहीं लैगार्ड ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सवाल है कि क्या 2012 यूरोऔरऔर भी

भारती एयरटेल ने अफ्रीका में 5 करोड़ से ज्यादा मोबाइल ग्राहक हासिल कर लिए हैं। कंपनी ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी। बता दें कि अफ्रीका में ग्राहकों को यह आधार उसे कुवैती टेलिकॉम कंपनी ज़ैन के अफ्रीकी कारोबार के अधिग्रहण से हासिल हुआ है। जून 2010 में उससे यह सौदा करीब 900 करोड़ डॉलर में किया था जिससे अफ्रीका के 15 देशों में उसकी पहुंच बन गई है। भारती एयरटेल इस समय एशियाऔरऔर भी

यूरोप के केंद्रीय बैंक में अंदरूनी मतभेद और ग्रीस द्वारा करों में और कमी किए जाने की घोषणा की खबरों के बाद यूरो ज़ोन में कर्ज संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। लेकिन इससे एशियाई बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख दर्ज किया गया। न्यूयॉर्क में कच्चे तेल (लाइट स्वीट क्रूड) का अक्टूबर में होने वाला मुख्य सौदा सोमवार 1.23 डॉलर की गिरावट के साथ 86.01 डॉलर प्रति बैरल परऔरऔर भी

मुद्रास्फीति में तेजी को लेकर चिंता के बीच एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों से वास्तव में भारत, चीन व थाईलैंड जैसे खाद्य निर्यातक एशियाई देशों को राष्ट्रीय आय बढ़ाने में मदद मिलती है। सिंगापुर के अग्रणी बैंक डीबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों से हर किसी को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि कुछ को लाभ होता है। एशिया में थाईलैंड, भारत और चीन खाद्य वस्तुओं केऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) में नया प्रबंध निदेशक चुनने की तैयारियां तेज हो गई हैं। पहली बार ऐसा लग रहा है कि परंपरा तोड़ते हुए आईएमएफ का नया मुखिया उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों से होगा और इस दौड़ में योजना आयोग के मोंटेक सिंह आहलूवालिया का नाम सबसे आगे है। अभी तक आईएमएफ के प्रमुख के पद पर यूरोपीय लोग ही रहे हैं। लेकिन गुरुवार को चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड ने साफ कह दिया कि डोमिनिक स्ट्रॉसऔरऔर भी

दुनिया में कच्चे तेल और खाद्यान्नों के दाम बढ़ने की रफ्तार यदि धीमी नहीं पड़ी तो एशियाई देशों में करीब दो करोड़ लोग गरीबी का जीवन जीने पर मजबूर हो जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 2011 की एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक और सामजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (यूएन एस्केप) के अनुसार यदि वर्ष 2011 में खाद्यान्न मूल्यों से जुड़ी मुद्रास्फीति दोगुनी हो जाती है औरऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया की स्थिति 16वीं व 17वीं सदी जैसी होने जा रही है। तब विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया का योगदान 60 फीसदी के आसपास था। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अब भारत, चीन और जापान के बीच आर्थिक सहयोग में मजबूती की उम्मीद करते हुए अनुमान जताया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में एशिया का योगदान 50 फीसदी से अधिक हो जाएगा। एडीबी ने कहा कि बेहतर परिदृश्य मेंऔरऔर भी

बाजार का बर्ताव वैसा ही रहा जैसा कि रोलओवर के करीब आने के दौरान होना चाहिए था। मालूम हो कि डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए शुक्रवार, 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सेटलमेंट गुरुवार, 28 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा। इन 28 दिनों में कारोबारी दिन केवल 20 ही हैं। दिक्कत यह है कि हमें सेटलमेंट के करीब आने और रोलओवर होने का ख्याल ही नहीं रहता, जबकि इसके आसपास का समय भारी उतार-चढ़ाव और अफवाहों से भरा होताऔरऔर भी