अच्छी कंपनियों के शेयर बढ़ते हैं, हवाबाज़ कंपनियों के डूबते हैं। यह सबक है अपनी चार साल की यात्रा का। ठीक चार साल पहले बीएएसएफ खरीदने की सलाह दी थी, जबकि वो 52 हफ्ते के शिखर 489.20 पर था। अभी 830.70 पर है, 490 उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम और 913.90 उच्चतम स्तर है। वहीं एक पंटर का बताया डेक्कन क्रोनिकल तब के 139 से अब 2.65 पर आ चुका है। तथास्तु में एक संभावनामय अच्छी कंपनी…औरऔर भी

वोकहार्ट ने बीते महीने 22 मई को वित्त वर्ष 2011-12 के सालाना और चौथी तिमाही के नतीजे घोषित किए। पता चला कि मार्च तिमाही में उसे जबरदस्त घाटा हुआ है। स्टैंड-एलोन स्तर पर 69 करोड़ रुपए और सब्सिडियरी व सहायक इकाइयों को मिलाकर कंसोलिडेटेड स्तर पर 192 करोड़ रुपए। जबकि, साल भर पहले की मार्च तिमाही में उसे स्टैंड-एलोन रूप से 32 करोड़ रुपए और कंसोलिडेटेड रूप से 162 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। यहीऔरऔर भी

देश में सबसे ज्यादा ऋण के बोझ तले दबा राज्य महाराष्ट्र है। रिजर्व बैंक के मुताबिक बीते साल 2010-11 में महाराष्ट्र के ऊपर 2.36 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इससे ठीक पीछे उत्तर प्रदेश है जिस पर कुल 2.34 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। फिर क्रम से पश्चिम बंगाल (1.98 लाख करोड़), गुजरात व आंध्र प्रदेश (1.36 लाख करोड़) और तमिलनाडु (1.09 लाख करोड़ रुपए) का नंबर आता है। राज्य के नए बजट अनुमान केऔरऔर भी

एक तरफ किंगफिशर एयरलाइंस अपना वजूद बचाने के चक्कर में लगी हुई है, सरकार ने उसे कोई भी आर्थिक पैकेज देने से इनकार कर दिया है, उसकी उड़ानें रद्द होने का सिलसिला जारी है, दूसरी तरफ कुछ लोग आम निवेशकों को इसके शेयर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्टॉक जल्दी ही ‘बाउंस-बैक’ करेगा। निवेशकों को ऐसे लोगों की बातों में कतई नहीं आना चाहिए क्योंकि वे लोग वैसे घाघ उस्तादों केऔरऔर भी

आप से यह साझा करने में मुझे कोई हर्ज नहीं लगता कि मैं भी एक छोटा निवेशक हूं। साल 2005 से निवेश करके सीखने-समझने की कोशिश में लगा हूं। हमेशा समझदारी से, पढ़-लिखकर निवेश करता हूं। खुद के फैसले पर कमाया है। औरों के कहने पर घाटा खाया है। पहले बड़े नामों पर भरोसा करता था। अब नहीं करता क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंककर पीता है। इकनॉमिक्स टाइम्स की इनवेस्टर गाइड में पहले एक इनसाइडरऔरऔर भी

दुनिया की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जापान के सरकार ऋणों की रेटिंग घटा दी है। उसने इसे एक पायदान नीचे खिसका कर Aa3 कर दिया है। अभी तक यह Aa2 थी। एजेंसी ने कहा कि 2009 की मंदी के बाद से ही जापान का ऋण बढ़ता जा रहा है और वहां राजनीतिक नेतृत्व बहुत तेजी से बदल रहा है जिससे कारगर आर्थिक रणनीति नहीं अपनाई जा पा रही है। बता दें कि जापान में पांचऔरऔर भी