अगर आप अपने से खुश हैं तो दुनिया भी आपकी परवाह करेगी। लेकिन अगर आप खुद अपने से ही दुखी हैं तो भगवान भी आपको नहीं बचा सकता। इसलिए अपनी कमियों व खूबियों का सही अहसास जरूरी है। न तो आत्ममुग्धता और न ही आत्मदया।और भीऔर भी

हम लूली-लंगड़ी सूचनाओं के आधार पर विचार फेंकने के आदी हो गए हैं। लेकिन यूं ‘ज्ञान’ बघारना विशुद्ध आत्ममुग्धता है। अरे! समाचार व सूचनाओं को तो खुलकर आने दो, विचार अपने-आप बन जाएंगे।और भीऔर भी

इसे अहम कहें या आत्ममुग्धता, हम अपने में खोए और आक्रांत रहते हैं। खूंटे से बंधी गाय की तरह हमारा वृत्त बंध गया है। आम से लेकर खास तक, ज्ञानी और विद्वान तक अंदर के चुम्बक से पार नहीं पा पाते।और भीऔर भी

वैसे तो हर मां को अपना कुरूप बच्चा भी रूपवान लगता है। लेकिन हम भी तो अपने पर फिदा रहते हैं। आईना हमें अपनी ही नजर से खुद को देखने का मौका देता है। सोचिए, आईना नहीं होता तो क्या होता?और भीऔर भी