सफल नीति – सब बेचें तो हम खरीदें

“सिंगापुर निफ्टी सूचकांक (एसजीएक्स सीएनएक्स) 5105 पर। मंदड़िए अपने को साबित करने और दोहरी तलहटी बनाने के लिए निफ्टी को 5040 तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। बाजार की हर डुबकी का इस्तेमाल निचले भावों पर खरीद में करें। मजबूत भरोसे के अभाव के चलते मेटल शेयरों पर चोट की जानी पक्की है।” यह वो संदेश है जो हमने गुरुवार को बाजार खुलने से पहले जारी किया था। वैसे, अगर यह इक्विटी बाजार है तो इसमें दो तरह के विचार होने ही हैं। शॉर्टे सेलिंग के बगैर कहीं भी स्वस्थ शेयर बाजार हो नहीं सकता। इसलिए शॉर्ट सेलर्स का आदर किया जाना चाहिए।

जब कोई चक्र सबसे निचले स्तर पर होता है, बेचने की कॉल तभी आती है और यह एक निश्चित अवधि के लिए सही साबित भी होती है क्योंकि बहुत सारे लोग उसके पीछे बह जाते हैं। मैंने आज ही एक लेख पढ़ा, जहां ऐसे अध्ययन का जिक्र है कि ट्रेडरों ने कैसे निवेशकों से कहीं ज्यादा पैसे बनाए हैं। साथ ही लेखक कहता है कि यह अध्ययन पूर्वाग्रह भरा है क्योंकि कोई ट्रेडर शेयर बाजार से पैसे नहीं बना सकता। मैं लेखक की बात से इत्तेफाक रखता हूं। हम अपनी स्ट्रीट कॉल्स में 90 फीसदी सफल रहते हैं। फिर भी आप ट्रेडरों से अलग से पूछें तो वे तमाम वजहें गिना देंगे कि वे क्यों नहीं पैसे बना पाए। खैर, इस समय बहस का मुद्दा यह नहीं है।

मुद्दा यह है कि कल बाजार का गिरकर उठना कुछ ज्यादा तेजी से हुआ जिसे हमने राहत व सुकून की रैली कहा, तो बिकवाली की कुछ और कोशिशों से कतई इनकार ही नहीं किया जा सकता था। समस्या निवेशकों के साथ यह है कि वे इस बात को समझना नहीं चाहते। अभी जिस तरह निफ्टी 5080-90 तक पहुंचा है उसमें बाजार गिरकर 4950 तक पहुंच जाए तो कोई अचंभा नहीं। फिर भी हर ट्रेडर बाजार को अपने हिसाब से पकड़ने में लगा है। वे 5100 पर बेचना और 5050 पर खरीदना चाहते हैं। इसके बाद फिर 5040 पर बेचने और 5000 पर खरीदने में लगते हैं। यही सिलसिला 5000 के नीचे बेचकर 4950 पर खरीद तक चलाते हैं। अगर आप खुद को इतना तेज और धुरंधर समझते हैं तो इस तरह के सौदे करने का आपका पूरा हक बनता है। नहीं तो मैं तो यही कहूंगा कि निवेश की अपनी क्षमता को चार हिस्सों में बांट लीजिए और हर गिरावट पर इसके एक हिस्से के बराबर खरीद कर लीजिए। इसके बाद बाजार के उठने का इंतजार कीजिए और देखिए कि दुनिया कैसे आपकी मुठ्ठी में आती है। वह भी बगैर किसी जोखिम के।

आप यूरोप की समस्या से इतने परेशान क्यों हैं? अरे, इसे हल होना है और यह हल हो जाएगी। यूरोप में ब्याज दरें और नीचे जाएंगी। तरलता बढ़ेगी और यह भारत व चीन जैसे उभरते बाजारों की तरफ आएगी। तब क्या ये स्टॉक आपको इन भावों पर मिलेंगे? जब कोई नहीं खरीदता तो खरीद करो और जब सब खरीदने में लगे हों तो आप बेचकर किनारे हो लो। बाजार में मुनाफा कमाने का यह सबसे उत्तम सिद्धांत है।

आईएफसीआई को हर बार हमने आगे बढ़ाया है। कल हम एनालिस्टों के साथ हुई इसकी बैठक में शामिल हुए जहां प्रबंधन ने बैंकिंग लाइसेंस की बात से साफ इनकार कर दिया और सही भी है। जब बजट में एनबीएफसी को बैंकिंग लाइसेंस देने का प्रस्ताव रखा गया तो यह महज प्रस्ताव था। अब रिजर्व बैंक ने इस पर समिति बनाने और उसकी सिफारिशें आने की जो समयसीमा तय की है, उसे देखते हुए इस बाबत कम से कम जुलाई तक कुछ भी नहीं होना है।

दो साल पहले जब आईएफसीआई का भाव 108 रुपए चल रहा था तब सरकार उसे बेचने में नाकाम रही क्योंकि खरीदनेवाले को आईएफसीआई में वो मजबूती नहीं दिखी। अब सरकार ने बजट के जरिए बैंक लाइसेंस देने का एक आधार बना दिया है। यकीनन, नया प्रबंधन आने के बाद बेहद मजबूत बैलेंस शीट और बैंकिंग लाइसेंस की संभावना ने आईएफसीआई को बहुत आकर्षक बाजी बना दिया है। कहने का मेरा मतलब यह है कि आईएफसीआई का नियंत्रण किन्हीं और हाथों में ले जाने की तैयारी हो चुकी है। और, इस बार आईएफसीआई को पहले से ज्यादा दाम मिल सकते हैं क्योंकि बोली लगानेवालों की संख्या इस बार ज्यादा रहेगी।

हम बाजार को हर इंच पर पकड़ना नहीं चाहते। गिरावट का यह माहौल खरीद का है। शिवालिक बाईमेटल ने आज शानदार नतीजे घोषित किए है। और वह ऐसा स्टॉक बन गया जो अगले कुछ महीनों में जायसवाल नेको की कहानी दोहराएगा।

जो सही वक्त के इंतजार में लगे रहते हैं, वक्त उनके हाथ से फिसलता जाता है। वह तो उन्हीं की साथ देता है जो उसे जैसा भी है, उसी रूप में स्वीकार कर बराबर सक्रिय रहते हैं।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है लेकिन फालतू के वैधानिक लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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