यूरोपीय ऋण संकट से निपटने को 750 अरब यूरो का पैकेज

यूरोप में ग्रीस, पुर्तगाल, इटली, आयरलैंड व स्पेन जैसे देशों की सरकारों को दीवालिया होने से बचाने के लिए यूरोपीय संघ ने नई पहल की है। इसके तहत करीब 750 अरब यूरो का राहत पैकेज तैयार किया गया है। लेकिन इसके साथ शर्त रखी गई है कि इस सरकारों को अपने खर्चों में कटौती करनी होगी, मितव्ययी बनना होगा। इस पैकेज में 60 अरब यूरो का योगदान यूरोपीय आयोग की ओर से किया जाएगा। इसके अलावा आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष) 250 अरब यूरो मुहैया कराएगा। जर्मनी को 123 अरब यूरो की गारंटी देनी पड़ेगी।

यूरोपीय संघ के विशाल आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद दुनिया के बाजारों में तेज़ी आई है। यूरो की विनिमय दर फिर से 1 डॉलर 30 सेंट के ऊपर चली गई है। जर्मन सूचकांक डाक्स में चार फ़ीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यूरोप व एशिया के अन्य बाज़ारों में भी तेज़ी आई है। ख़ासकर फाइनेंस और बीमा कंपनियों के शेयरों के भाव बढ़े हैं। लेकिन ग्रीस और पुर्तगाल जैसे संकटग्रस्त देशों के बांड की कीमतें गिरी हैं।

मौजूदा हालात के बारे में स्वीडन के विदेश मंत्री आंदर्स बोर्ग ने बड़ी दिलचस्प टिप्पणी की कि वित्तीय बाजार में भेड़ों के झुंड दिखाई दे रहे हैं, लेकिन दरअसल ये भेड़ियों के झुंड हैं। अगर इन भेड़ियों को नहीं रोका गया तो वे कमज़ोर देशों को नोच डालेंगे। वैसे, इस पैकेज का सबसे कमजोर पहलू सरकारी खर्चों में कटौती है जिसका वहां के आम नागरिक विरोध कर रहे हैं। खासकर ग्रीस में लोग इसके विरोध में भारी तादाद में सड़कों पर उतर आए हैं।

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल और विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले ने कहा है कि यूरो के लिए यूरोपीय संघ के बचत पैकेज का कोई विकल्प नहीं था। मैर्केल का कहना है कि इससे जर्मनी के लोगों के धन की रक्षा की गई है। साथ ही यह बाजार के लिए एक स्पष्ट संकेत है। दूसरी तरफ जर्मन विदेश मंत्री वेस्टरवेले ने कहा कि यूरो पर हमला करनेवाले सट्टेबाजों को जान लेना चाहिए कि यूरोपीय संघ इन हमलों का जवाब दे सकता है। इस सिलसिले में मंगलवार को जर्मन कैबिनेट की एक विशेष बैठक भी बुलाई गई है।

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