म्यूचुअल फंड ब्रोकर बदलना टेढ़ी खीर

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के निर्देश के बावजूद अब भी वितरक/ब्रोकर ग्राहकों के कागजात म्यूचुअल फंड को नहीं दे रहे हैं। सेबी ने बीते दिसंबर माह से ही यह नियम बना दिया हैं कि म्यूचुअल फंड निवेशक को किसी दूसरे ब्रोकर या मध्यस्थ की सेवा लेने के लिए पुराने ब्रोकर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन ब्रोकर अब भी किसी न किसी बहाने ग्राहक के निवेश संबंधी दस्तावेज देने में आनाकानी कर रहे हैं।

मुंबई के रहनेवाले एक विदेशी एयरलाइंस कर्मचारी संजीव (बदला हुआ नाम) का उदाहरण लेते हैं। 32 साल के संजीव ने विदेशी बैंक के जरिए म्यूचुअल फंड स्कीम खरीदी थी। लेकिन उनकी शिकायत है कि वह विदेशी बैंक तो म्यूचुअल फंड स्कीम बेच कर किनारे हो गया। उसके बाद से आज तक उसने कोई सेवा नहीं दी है। लिहाजा संजीव ने एजेंट बदलने के आवेदन के साथ अपने घर की नजदीकी एचडीएफसी म्यूचुअल फंड शाखा में गए, जहां उनसे कहा गया कि उन्हें नए सिरे से आवेदन करना होगा। संजीव की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई। एचडीएफसी मुचुअल फंड शाखा ने कई तरह के कागजात की मांग उनसे की। पैन कार्ड से लेकर फोलियो नंबर और स्कीमों के विवरण के अलावा कहा गया है कि वे पुराने ब्रोकर से अपने हस्ताक्षर को सत्यापित करके लाएं।

इन कागजात को जुटाने में संजीव जैसे आम निवेशकों का काफी वक्त जाया हो जाता है। बता दें कि सेबी ने दिसंबर 2009 में एजेंट बदलने के लिए पुराने एजेंट से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने संबंधी नियम समाप्त कर दिया। पुराने नियम की वजह से निवेशकों को काफी झंझट उठानी पड़ती थी क्योंकि पुराने एजेंट या वितरक अनापत्ति प्रमाणपत्र देने में आनाकानी करते थे।

सेबी ने फंड हाउसों से कहा कि वे ब्रोकरों व राष्ट्रीय मुचुअल फंड वितरकों से नो-योर-कस्टमर (केवाईसी) कागजात दिसंबर 2009 के मध्य तक जरूर हासिल कर लें। पर अभी तक यही नहीं हो पाया है। अभी तक हस्ताक्षर व अन्य विवरण वितरक के पास ही पड़े हैं। ऐसे हालात में फंड हाउस करें तो क्या करें? वे निवेशक के ब्यौरे की जांच आखिर कहां से करें? एक फंड हाउस के अधिकारी का कहना है कि इसके लिए हम निवेशक से ही कह रहे हैं कि वही अपने हस्ताक्षर पुराने ब्रोकर से वेरीफाई करवा कर ले आए।

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