बाजार में आ रहा है राजनीतिक धन

मैं यह पढ़कर सचमुच दंग रह गया कि दुनिया के सबसे अच्छे जानकार कह रहे हैं कि हाथी (भारत) नाच रहा है। विश्व की एक अन्य प्रमुख संस्था ने आज कहा कि जापान के अलावा बाकी एशिया के शेयर बाजार कई सालों के तेजी के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इस बारे में मैं अपने विचार तब ही व्यक्त कर चुका हूं, जब कोई भी शेयरों पर दांव लगाने को तैयार नहीं था।

बाजार पर नजर रखनेवाले तमाम दूसरे लोग और संभ्रांत किस्म के विशेषज्ञ उस समय यही राग आलाप रहे थे कि बाजार (निफ्टी सूचकांक) 4500 अंकों की तरफ जा रहा है और कुछ की तो राय थी कि अब यह 3800 पर जाकर टिकेगा। लेकिन मैं लगातार इस राय पर कायम रहा कि बाजार का रुख ऊपर की ओर रहेगा।

मेरे इस विश्वास की तीन वजहें थीं। एक, बजट के पहले किए गए शॉर्ट सौदे अब भी बरकरार हैं और इन सौदों को तब तक नहीं काटा जाएगा जब तक निफ्टी 5280 पर नहीं पहुंचता। दो, चंद हाथों में ही ज्यादा शेयर हैं और भले ही ज्यादातर कारोबारी करेक्शन की चाहत रखते हैं, लेकिन शेयरों के मालिकाने के सिमटे होने के कारण बाजार चढ़ेगा। और तीसरी व सबसे अहम वजह यह कि एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) का खेल बाजार के इस हिस्से को फायदा पहुंचाएगा और शायद उन्हें उन फंड स्कीमों की तरफ खीचेगा जो अभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हैं।

बाजार के उठने की एक और भी वजह है जो थोड़ा हटकर है। वह यह कि शेयर बाजार में लग रहा अधिकांश धन राजनीतिक है। हो सकता है कि इसी वजह से जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के नए इश्यू किसी तरह पूरे हो पा रहे हैं, वहीं निजी कंपनियों के आईपीओ को शानदार रिस्पांस मिल रहा है। जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के इश्यू को बेहद ठंडा रिस्पांस मिला है, वहीं निजी कंपनियों के आईपीओ 50 से 80 गुना ओवरसब्सक्राइब हो रहे हैं।

असल में निजी कंपनियों के आईपीओ में धन लगाने का सारा खेल आईपीओ के पहले ही हो जाता है। लिस्ट होते ही इन कंपनियों के शेयर छलांग लगा जाते हैं। पहले ही दिन 40 से 80 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की जाती है जो किसी भी कार्टेल के लिए जबरदस्त मुनाफे का सौदा है। हालांकि यह भी सच है कि लिस्टिंग के दिन बाजार में जमकर शेयरों के भाव के साथ खेल किया जाता है।

खैर, मैंने कुछ दिन पहले ही कहा था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पर मेरी खरीद सलाह कभी भी गलत नहीं रही है। अब हुआ यह है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में आरआईएल में बोनस दिए जाने के बाद की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई है। मैंने इसका अनुमान इसी जगह पहले ही व्यक्त कर दिया था।

अब बात निफ्टी की। सीएनआई ने 19 जनवरी 2010 को निफ्टी में 5233 पर खरीद की सलाह थी और यह सलाह अब भी कायम है, भले ही इस दौरान निफ्टी एक समय गिरकर 4650 तक जा चुका हो। आज निफ्टी 5177 पर रहा जो हमारी सलाह के स्तर से महज 50 अंक पीछे है। कारोबारियों को यह जान लेने की जरूरत है कि इस दौरान सीएनआई ने पांच से सात बार निफ्टी में खरीद की सलाह दी है और यह सभी सौदे फायदे में रहे हैं। अगर गणितीय आधार पर देखें तो निफ्टी में लांग सौदे 4700 या उसके आसपास के हैं, जबकि वह 5200 के करीब आ चुका है। और, यही डेरिवेटिव सौदों से लाभ कमाने का असली तरीका है।

सरकारी विनिवेश की अगली कड़ी के तहत सतलज विद्युत की मार्केटिंग शुरू हो चुकी है और आईडीबीआई को इस इश्यू से कुछ लाभ जरूर मिलेगा। वैसे तो बढ़ती मुद्रास्फीति के इस दौर में ब्याज दरें बढ़ने का जोखिम भी बढ़ गया है। लेकिन सीएनआई इसी राय पर कायम है कि बाजार बढ़ रहा है और आगे भी बढ़ेगा।

आप हकीकत से आंखें चुरा सकते हो, लेकिन उसके असर से बच पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं है।

(चमत्कार चक्री एक काल्पनिक नाम है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है लेकिन फालतू के वैधानिक लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। अंदर की बात बताना और सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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