केयर्न के शेयरधारकों को 355 रुपए तो प्रवर्तकों को मिलेंगे 405 रुपए/शेयर

कबाड़ी से धातु सम्राट बने वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल ने सोमवार को लंदन में बाकायदा एलान कर दिया कि वे तेल व गैस भंडार के मामले में भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी केयर्न इंडिया की 51 से 60 फीसदी इक्विटी खरीद रहे हैं। इसमें से 20 फीसदी इक्विटी वेदांता समूह की कंपनी सेसा गोवा ओपन ऑफर के जरिए खरीदेगी। बाकी कम से कम 40 फीसदी इक्विटी वेदांता समूह केयर्न इंडिया की ब्रिटिश प्रवर्तक केयर्न एनर्जी से खरीदेगा। ओपन ऑफर में प्रति शेयर मूल्य 355 रुपए तय किया गया है, जबकि केयर्न एनर्जी को प्रति शेयर 405 रुपए दिए जाएंगे, जिसमें से 50 रुपए नॉन-कम्पीट समझौते के लिए है।

केयर्न इंडिया की मौजूदा चुकता पूंजी 1897 करोड़ रुपए है जो 10 रुपए अंकित मूल्य के 189 करोड़ 73 लाख 47 हजार 234 शेयरों में विभाजित है। अगर 20 फीसदी ओपन ऑफर कामयाब होता है कि इससे कंपनी के पब्लिक शेयरधारकों को 13,469 करोड़ रुपए मिलेंगे। लेकिन अगर वेदांता समूह का अधिग्रहण सेबी के नए टेकओवर नियमों के लागू होने के बाद होता तो पब्लिक शेयरधारकों को भी प्रवर्तकों के बराबर प्रति शेयर 405 रुपए दिए जाते और उन्हें कुल 15,366 करोड़ रुपए मिले होते। इस तरह मौजूदा टेकओवर नियम से जहां केयर्न इंडिया के पब्लिक शेयरधारकों को 1897 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, वहीं वेदांता समूह को इतने का फायदा हो गया है।

केयर एनर्जी ने अपनी तरफ से स्पष्ट किया है कि वेदांता समूह की तरफ से केयर्न इंडिया के शेयरधारकों को दिए गए 20 फीसदी ओपन ऑफर की समाप्ति के बाद ही वह अपनी हिस्सेदारी बेचने का करार पूरा करेगी। वेदांता समूह द्वारा केयर्न एनर्जी से खरीदी जानेवाली हिस्सेदारी कम से कम 40 फीसदी और ज्यादा से ज्यादा 51 फीसदी हो सकती है। इस समय केयर्न इंडिया में ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी की हिस्सेदारी 62.36 फीसदी है। अपनी हिस्सेदारी का निर्धारित अंश वेदांता समूह को बेचने के बाद भी भारतीय कंपनी में केयर्न एनर्जी की हिस्सेदारी 11.36 फीसदी से 22.36 फीसदी रह सकती है।

लंदन में अनिल अग्रवाल की तरफ से की गई घोषणा के अनुसार वेदांता समूह केयर्न इंडिया के सौदे के लिए 850 करोड़ डॉलर (51 फीसदी इक्विटी) से लेकर 960 करोड़ डॉलर (60 फीसदी इक्विटी) नकद देगा। इसमें से 300 करोड़ डॉलर वेदांता समूह की कंपनी सेसा गोवा 20 फीसदी ओपन ऑफर पर खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि इस अधिग्रहण से प्राकृतिक संसाधनों के विजेता के रूप में भारत में वेदांता समूह की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ केयर्न एनर्जी के सीईओ बिल गैमेल का कहना था कि उन्हें काफी खुशी है कि केयर्न इंडिया की शेयरधारिता के बड़े हिस्से को निकालने से मिला लाभ वे मूल कंपनी के शेयरधारकों को दे सकेंगे।

वैसे, खुद को गैमेल को इससे काफी ज्यादा फायदा मिलेगा। 25 सितंबर 2009 को उनके पास केयर्न एनर्जी के 3,71,302 शेयर हैं जो 16 मार्च 2010 को 39,31,778 हो चुके हैं। हालांकि उनकी शेयरधारिता कंपनी में एक फीसदी से भी कम है। बता दें कि केयर्न इंडिया का आईपीओ दिसंबर 2006 में प्रति शेयर 160 रुपए पर जारी किया गया था। प्रवर्तक कंपनी को इस अधिग्रहण में प्रति शेयर 405 रुपए मिलेंगे। इस तरह करीब साढ़े तीन साल में उसे आईपीओ के मूल्य पर ही 153 फीसदी का फायदा मिलेगा।

वैसे, इस अधिग्रहण को अभी तमाम अन्य मंजूरियों के साथ भारत सरकार की मंजूरी मिलनी जरूरी है और वहां से इसमें देरी भी हो सकती है। यहां तक कि इसे नामंजूर किए जाने का भी अंदेशा है क्योंकि पेट्रोलियम मंत्रालय के कुछ अधिकारियों का कहना कि केयर्न इंडिया के राजस्थान स्थित तेल भंडारों में ओएनजीसी की 30 फीसदी हिस्सेदारी है। साथ ही ओएनजीसी पूरे उत्पादन पर कई तरह के बोझ उठाता है। इसलिए अधिग्रहण का पहला अधिकार ओएनजीसी का बनता है न कि किसी ऐसे समूह का जिसका अभी तक दूर-दूर तक तेल व गैस खनन उद्योग से कोई वास्ता नहीं रहा है।

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