मोदी सरकार गरीबों, किसानों व आमलोगों का भला करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में वह अमीरों व कॉरपोरेट्स का ही भला कर रही है। मसलन, वितरित लाभांश पर पहले कंपनियों को सेस-सरचार्ज मिलाकर 20.56% टैक्स देना पड़ता था। लेकिन इस साल से उन्हें नहीं, बल्कि शेयरधारकों को लाभांश पर टैक्स देना पड़ेगा। सरकार ने कंपनियों के भले के लिए आम निवेशकों को दबाया, खुद भी घाटा उठाया। आज तथास्तु में जमकर लाभांश देनेवाली एक कंपनी…औरऔर भी

शेयरों के भाव का चक्र चलता है। इसी चक्र की बदौलत निवेशक और ट्रेडर उसमें धन लगाकर कमाते हैं। बिजनेस अच्छा चलता रहा और शेयरों की मांग बनी रही तो उतार-चढ़ाव से गुजरते शेयर का ग्राफ हमेशा ऊपर ही ऊपर उठता है। बिजनेस खराब हुआ तो उतार-चढ़ाव के गुजरता शेयर अंततः डूबता चला जाता है। कंपनियां का बिजनेस भी उतार-चढ़ाव से गुजरता है। कोई-कोई कंपनी डूबते-डूबते अचानक उबर जाती है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

कोई शेयर आगे कहां तक जाएगा, कब तक जाएगा, इसको लेकर ट्रेडर, दीर्घकालिक निवेशक या यूं ही दांव लगा रहे सटोरिये की धारणा या गणना अलग-अलग होती है क्योंकि धन लगाने की इनकी समयसीमा भिन्न होती है। बाज़ार का सच अगर इनकी सोच से मेल खा जाए या आगे निकल जाए तो फायदा ही फायदा, अन्यथा घाटा। सारा खेल वर्तमान के सच और भविष्य की सोच व सच के अंतर का है। अब तथास्तु में आज कीऔरऔर भी

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सर्व-स्वीकृत मुद्रा डॉलर का देश होने के कारण अमेरिका हमारे लिए बहुत खास है। साथ ही बाइडन की जीत और ट्रम्प की हार ने दिखा दिया कि झूठ की उम्र बड़ी छोटी होती है। झूठों के सरताज़ ट्रम्प आखिरी समय तक झूठ बोलते रहे, लेकिन टांय-टांय फिस। इसी तरह ट्रेडिंग में भले ही झूठ चल जाए, लेकिन लंबे निवेश में हमेशा सच ही चलता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

दशकों से अपने यहां शेयर बाज़ार के निवेशकों की संख्या बढ़ाने का अभियान चालू है। लेकिन ढाक के वही तीन पात। हां, ब्रोकरों की कमाई ज़रूर बढ़े जा रही है। वे हर डीमैट खाता खुलवानेवाले से एनुअल मेंटेनेन्स चार्ज लेते हैं। नए खातों के लिए 50,000 से लेकर दो लाख रुपए तक की होल्डिंग पर 100 रुपए। ज्यादा हो तो 300 रुपए। खाता सक्रिय न हो, तब भी। 18% जीएसटी अलग। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

कहावत है कि गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की तरह भागता है। अपने यहां लोगों की नौकरी छूटती है तो वे शेयर बाज़ार की तरफ भागते हैं। खुद नहीं तो बीवी से चाहते हैं कि वह ट्रेडिंग/निवेश से कुछ कमाकर लाए। भूल जाते हैं कि शेयर बाज़ार आम लोगों के लिए कमाने का नहीं, बल्कि जो पहले से कमा रखा है, उसे बचाने या बढ़ाने का जरिया है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

दुविधा का दौर है। निफ्टी, सेंसेक्स कभी उछल जाते हैं तो कभी निपट जाते हैं। कुछ स्टॉक्स बढ़े चले जा रहे हैं तो कुछ उठने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में समझदारी से किया गया निवेश भी गलत साबित हो सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि जब तक शेयर बाज़ार सामान्य अवस्था में नहीं लौट आता, तब तक हम जितना धन निवेश करना है, उसका आधा ही लगाएं। बाकी कैश बचाकर रखें। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

रिजर्व बैंक को जीडीपी के 9.5% घटने का अंदेशा है। लेकिन मोदी सरकार बेधड़क कहती है कि उसने अर्थव्यवस्था व अवाम के कल्याण के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन। 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज। वह टीसीएस और एचडीएफसी के अच्छे नतीजों को भी अपनी उपलब्धि बताती है। देश अगर वाकई शिक्षित होता तो सरकार इतनी हवाबाज़ी नहीं कर पाती। आज तथास्तु में शिक्षा व्यवसाय से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था कब वापस पटरी पर आएगी, नहीं बताया जा सकता। लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। वाहनों की बिक्री, एयर ट्रैफिक, टोल संग्रह और रेलवे से माल लोडिंग बढ़ने लगी है। मानसून औसत से बेहतर रहा है तो खरीफ की फसल अच्छी रहेगी। वैसे भी कोरोना संकट में हमारी अर्थव्य़वस्था बढ़ने के बजाय जब 23.9% सिकुड़ गई, तब कृषि की विकास दर 3.4% रही है। आज तथास्तु में कृषि बिजनेस से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

समूचे शेयर बाज़ार या किसी खास शेयर की भावी चाल के बारे में कुछ भी कहना खतरे से खाली नहीं। न्यूटन जैसे वैज्ञानिक, शोल्स जैसे नोबेल विजेता अर्थशास्त्री और बेहद विकसित कंप्यूटर अल्गोरिदम भी यह अनुमान लगाने में मात खा चुके हैं। इसलिए मानकर चलें कि कोई भी अनुमान गलत साबित हो सकता है। यह शेयर बाज़ार में निवेश का अंतर्निहित रिस्क है जिसे भलीभांति समझकर ही इसमें धन लगाना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी