वॉरेन बफेट जैसे धुरंधर तक हमेशा सही नहीं होते तो हम-आप किस खेत की मूली हैं। अक्सर लगातार ट्रेड सही पड़ने के बाद हम बम-बम करने लगते हैं। गुमान हो जाता है कि हम गलत नहीं हो सकते। घाटा मारता है तो उस ट्रेड से निकलने के बजाय पोजिशन बढ़ाते जाते हैं। होश तब आता है जब सारा मुनाफा उड़नछू हो जाता है। याद रखें, बाज़ार में अतिविश्वास हमेशा आत्मघाती होता है। चलिए, परखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भारतीय शेयर बाज़ार में पिछले डेढ़ महीने में किसी एक दिन में ऐसी तल्ख गिरावट नहीं आई थी। सेंसेक्स कल 1.21% और निफ्टी 1.36% गिर गया। डर है कि मंगल को देर रात से शुरू हुई दो दिनी बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व कहीं समय से पहले ब्याज दर बढ़ाने का फैसला न कर ले। इस आशंका में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। क्या हैं, इस बिकवाली के मायने? समझते हैं आगे…औरऔर भी

अंदाज़ से ट्रेडिंग करने से बेहतर है कि किसी कैसिनो में जाकर अपनी किस्मत आजमाएं। जब तक साफ-साफ न पता हो कि बाज़ार में कौन-कौन सी शक्तियां सक्रिय हैं, उनका संतुलन कैसा है, जिस स्टॉक में हाथ लगाने जा रहे हैं उसकी प्रकृति क्या है, समग्र आर्थिक परिवेश व रुझान क्या है, तब तक आपको ट्रेडिंग में हाथ नहीं लगाना चाहिए। हम तो महज एक इनपुट है, मदद हैं। पूंजी आपकी, कमाना आपको। अब बुधवार का अभ्यास…औरऔर भी

प्रवर्तकों से मिलकर खेल करनेवाले इनसाइडर ट्रेडरों को छोड़ दें तो शेयर बाज़ार में रिटेल और प्रोफेशनल, दो ही तरह के ट्रेडर आपस में भिड़ते हैं। प्रोफेशनल ट्रेडर ज्यादा समय व संसाधन लगाता है तो उसकी स्थिति बेहतर होती है। लेकिन वो छोटे सौदों को हाथ नहीं लगा सकता। रिटेल ट्रेडर ऐसे कई मसलों में उस पर भारी पड़ता है। रिटेल ट्रेडरों को इन खासियतों को समझकर अपनी ट्रेडिंग रणनीति बनानी चाहिए। अब देखें बुधवार की धार…औरऔर भी

आप चाहें तो सर्वे करके देख सकते हैं कि जो लोग ट्रेडिंग में टिप्स के पीछे भागते हैं, वे मरीचिका के चक्कर में भागते हिरण की तरह ताज़िंदगी प्यासे रह जाते हैं। लंबे निवेश में यकीनन रिसर्च आधारित सलाह काम करती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने, निकलने, घाटा खाने और पूंजी बचाने व बढ़ाने का सिस्टम बनाकर अनुशासन का पालन न किया, लालच व डर को हावी होने दिया तो कमाई मुमकिन नहीं। अब बुधवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

पेन्नी स्टॉक्स के नाम पर आम निवेशकों को फंसाने का खेल समूची दुनिया में व्याप्त है। बीते हफ्ते बाकायदा मेरे नाम पर एक ई-मेल आया कि आरसीएचए नाम का स्टॉक खरीद लीजिए। शुक्रवार को यह 20 सेंट का था। हफ्ते भर में पांच गुना बढ़कर एक डॉलर हो जाएगा। वाकई दो दिन में 60% बढ़कर 34 सेंट पर पहुंच गया! लेकिन यह ट्रैप है, अभिमन्यु को मारने का चक्रव्यूह। अब रामनवमी के अवकाश के बाद की ट्रेडिंग…औरऔर भी

यूं तो परिचित हैं हज़ारों। पर काम के दोस्त अक्सर 40-50 से ज्यादा नहीं होते। दरअसल इससे ज्यादा ज़रूरत भी नहीं। इसी तरह निवेश व ट्रेडिंग में हमें अपने व्यक्तित्व के हिसाब से स्टॉक्स चुनने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा 40 कंपनियों में निवेश हो तो उनका अलग-अलग रिस्क कटकर मिट जाता है। ट्रेडिंग के लिए भी 20 स्टॉक्स बहुत होते हैं। इनसे गहरी पहचान हो तो कमाना आसान हो जाता है। अब करें नए साल-2014 का आगाज़…औरऔर भी

कुछ कंपनियों के बढ़ने से अर्थव्यवस्था बढ़ती है और कुछ कंपनियां अर्थव्यवस्था के बढ़ने से बढ़ती हैं। 1938 में डेनमार्क के दो इंजीनियरों हेनिक हॉक-लार्सन और सोरेन क्रिस्टियान टुब्रो द्वारा मुंबई में अपने नाम पर बनाई गई एल एंड टी दूसरी तरह की कंपनी है। हालांकि ये दोनों संस्थापक इतिहास के बस नाम भर रह गए हैं। इनका धेले भर का भी लेना देना अब एल एंड टी से नहीं है। यह पूरी तरह प्रोफेशनलों की तरफऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ब्याज दरों को बराबर बढ़ा रहा है, फिर भी मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लग रही। हां, इससे आर्थिक विकास की रफ्तार पर जरूर लगाम लगती दिख रही है। बाजार को यह कतई पसंद नहीं और वो किसी न किसी बहाने लार्सन एंड टुब्रो, इनफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), एसबीआई व मारुति सुजुकी जैसी ऊंची विकास दर वाली कंपनियों को भी लपेटे जा रहा है। रिलायंस का स्टॉक दो साल के न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।औरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने हफ्ते भर पहले सोमवार, 23 मई को घोषित किया कि वित्त वर्ष 2010-11 में उसका टर्नओवर 22.94 फीसदी बढ़कर 43,394.58 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.45 फीसदी बढ़कर 6011.20 करोड़ रुपए हो गया है। उसके पास 1.64 लाख करोड़ रुपए के अग्रिम ऑर्डर हैं। लेकिन उसका शेयर शुक्रवार 20 मई के 2074.40 रुपए से भाव से 6.69 फीसदी गिरकर 1935.60 रुपए पर आ गया। इसके बादऔरऔर भी