लोकपाल मसौदा विधेयक के दो संस्करण कैबिनेट को भेजने के सरकार के निर्णय पर ‘आश्चर्य’ जताते हुए गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे ने कहा है कि सख्त लोकपाल कानून बनाने की केन्द्र की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कमजोर कानून बना तो वह 16 अगस्त से फिर अनशन करेंगे। गुरुवार को हज़ारे ने कहा कि सरकार ने बीते अप्रैल में लोकपाल मसौदा समिति का गठन कर वादा किया था कि यह समिति ‘आम सहमति’औरऔर भी

सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार गांधीवादी विरोध के तौरतरीकों को पचा नहीं पा रही है। यही वजह है कि उसने गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे को जंतर मंतर पर कल (बुधवार) को एक दिन विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। हज़ारे अब टकराव को टालने के लिए महात्मा गांधी की समाधि, राजघाट पर पर अनशन करेंगे। यह घोषणा हज़ारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने की। साथ ही उन्होंने जोर देकरऔरऔर भी

योगगुरु बाबा रामदेव ने दस सालों में जनता-जनार्दन में जो भी प्रतिष्ठा कमाई थी, उनकी एक चूक से वह एकदम मिट्टी में मिल गई। बाबा ने शुक्रवार को ही सरकार के साथ डील कर ली थी कि रामलीला मैदान में शनिवार सुबह को शुरू हुआ अनशन दोपहर तक खत्म कर देंगे, लेकिन 6 जून तक ‘तप’ जारी रहेगा। खुद बाबा रामदेव ने स्वीकार किया कि उनकी तरफ से संगठन के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने सरकार को इसऔरऔर भी

कालेधन के मुद्दे पर भूख हड़ताल करने की बाबा रामदेव की चेतावनी के बीच आयकर विभाग ने कहा है कि वह काली कमाई के रुप में विदेश छुपाए गए देश के धन को निकलवाने के बारे में योगगुरु के सुझावों पर विचार करने को तैयार है। बाबा रामदेव ने कालेधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 4 जून से भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे रखी है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुधीर चन्द्रा नेऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए जागरूक नागरिकों और मंत्रियों की दस सदस्यीय समिति गठित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। शनिवार को बाकायदा राजपत्र में इसे अधिसूचित कर देने के बाद देश के दूसरे गांधी बन चुके सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने मंगलवार से जारी अपना आमरण अनशन तोड़ दिया। राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर पर 73 वर्षीय हजारे ने अपने हजारों उत्साही समर्थकों के बीच सरकार की ओर सेऔरऔर भी