बाजार में विश्वास का स्तर एकदम डूबने की कगार पर पहुंच चुका है। इस बीच कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने डीएमके के पराभव के बाद पहली बार जयललिता की तरफ हाथ बढ़ाया है। लगता है कि जैसे मैडम इसी दिन का इंतजार कर रही थीं। अगर गठबंधन सत्ताधारी पार्टी की मजबूरी है तो विधानसभा चुनावों के नतीजों ने रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार व घोटाले के इस माहौल में यकीकन उसकी मजबूरी को थोड़ा हल्का किया है। मुझे नहीं लगताऔरऔर भी

बाजार को कल ही आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के शानदार आंकड़ों के बाद 5600 के पार चला जाना चाहिए था। लेकिन भारतीय बाजार ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि वह कुछ ट्रेडरों और एफआईआई के कार्टेल के शिकंजे में है जो फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में बाजार को जब चाहें, मनमर्जी से नचा सकते हैं। रिटेल निवेशक आईआईपी के घोषित होने के बाद उत्साहित होकर खरीद बढ़ाने लगे तो इस कार्टेल ने निफ्टी पर चोटकरऔरऔर भी