आरईआई में अब 75% एफआईआई

आरईआई एग्रो के निदेशक बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया है कि कंपनी में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) निवेश कुल चुकता पूंजी के 75 फीसदी हिस्से तक हो सकता है।  कंपनी से यह सूचना मिलने के बाद रिजर्व बैंक के इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। कंपनी जिस उद्योग में है उसमें एफआईआई निवेश की सीमा तय करने का अधिकार कंपनी के निदेशक बोर्ड का होता है।

इस अधिसूचना के बाद एफआईआई इक्विटी शेयरों और परिवर्तनीय डिबेंचरों के जरिए आरईआई एग्रो में पोर्टफोलियो निवेश स्कीम (पीआईएस) के तहत 75 फीसदी तक निवेश कर सकते हैं। एफआईआई अब प्राइमरी बाजार के साथ-साथ शेयर बाजार से कंपनी में इस सीमा तक शेयर खरीद सकते हैं। लेकिन किसी भी एक एफआईआई की इक्विटी हिस्सेदारी कंपनी में 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती।

बता दें कि मार्च 2010 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक आरईआई एग्रो की 31.93 करोड़ रुपए की इक्विटी में एफआईआई की हिस्सेदारी 23.64 फीसदी है, जबकि प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 37.89 फीसदी है। इस समय कंपनी में निवेश करनेवाले प्रमुख एफआईआई हैं – पिकटेट कंट्री फंड (मॉरीशस), बीएनवाई मेलॉन एशियन इक्विटी फंड, बीएनवाई मेलॉन इनवेस्टमेंट फंड्स न्यूटन मैनेज्ड फंड, सोमरसेट इमर्जिंग अपॉरच्युनिटी फंड, एलारा अपॉरच्युनिटी फंड और सीआई प्रो फंड।

एफआईआई निवेश की सीमा बढ़ाकर 75 फीसदी कर देने से ऐसा नहीं होगा कि तुरंत एफआईआई इसमें निवेश बढ़ा लेंगे। लेकिन कंपनी के निदेशक बोर्ड का यह प्रस्ताव ऐसे किसी संभावित निवेश की बाधा दूर कर देता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कुछ एफआईआई ने कंपनी में बड़ा निवेश करने की इच्छा जताई होगी। आरईआई एग्रो के शेयर में 23 जून 2010 को 11.99 फीसदी उछाल दर्ज किया गया था और वह 32.70 रुपए पर बंद हुआ था। तब से लेकर अब तक के दो हफ्तों में वह कमोवेश इसी स्तर के आसपास बना हुआ है। शुक्रवार, 9 जुलाई को यह बीएसई में 29.95 और एनएसई में 30 रुपए पर बंद हुआ है।

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