बजट से पहले चढ़ता तेजी का सुरूर

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजार को नहीं तोड़ सकता था। वे एक हफ्ते में 200 करोड़ डॉलर के स्टॉक भी बेच डालते, तब भी ऐसा मुमकिन नहीं है। असल में कुछ एफआईआई ने मंदड़ियों के कार्टेल के साथ मिलकर सारा खेल किया है और इस काम में सिस्टम की कमियां-खामियां उनकी मददगार साबित हुई हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे अपना पद नहीं छोड़नेवाले हैं, भले ही प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ानेवाला सत्ताधारी पार्टी का भेदिया शख्स उन्हें हटाने के कितने भी करतब कर डाले। प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों की मौजूदगी को बाकायदा स्वीकार किया। लेकिन भरोसा दिलाया कि किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उनका यह भरोसा दिखाता है कि इस ‘कैंसर’ को मिटाने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने मुद्रास्फीति की चिंता की भी बात की। लेकिन कहा कि पक्के तौर पर इससे मार्च 2011 से पहले निपट लिया जाएगा।

बाजार पिछले तीन दिनों से गिरावट या करेक्शन से दूर रहा है। आज भी बाजार अच्छी-खासी बढ़त लिए रहा। यह मंदड़ियों के थकने का पहला संकेत है। सेंसेक्स आज 1.13 फीसदी बढ़कर 18,506.82 और निफ्टी 1.22 फीसदी बढ़कर 5548.65 पर पहुंच गया। समझ लीजिए कि अब शॉर्ट कवरिंग के चलते बजट तक अच्छी तेजी देखने को मिलेगी।

बजट सत्र शुरू होने से पहले अब बाजार का केवल एक कारोबारी सत्र बचा है। इस दरिम्यान शॉर्ट सेलर शॉर्ट ही रहेंगे क्योंकि उन्हें नहीं पता कि आगे क्या होनेवाला है। लोकलुभावन बजट को बाजार डिस्काउंट या मान कर चल रहा है। लेकिन वित्तीय सुदृढ़ीकरण या राजकोषीय घाटे को कम करने के बारे में अभी तक बाजार में कोई राय नहीं बन पाई है। फिलहाल निफ्टी में हमारा पहला लक्ष्य 5560 का है, उसके बाद 5620 और फिर संभव है कि बजट से पहले वो 5700 तक पहुंच जाए।

किसी व्यक्ति की कल्पना-शक्ति उसके संचित व अर्जित ज्ञान से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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