परसिस्टेंट सिस्टम्स में निवेशक बड़े

परसिस्टेंट सिस्टम्स इतनी मरी-गिरी कंपनी नहीं है कि उसका शेयर अगर जमीन पर गिर जाए तो उसे खोटा सिक्का मानकर उठाया ही न जाए। 1990 में बनी कंपनी है। सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेलपवमेंट सेवाओं में सक्रिय है। 6600 से ज्यादा कर्मचारी हैं। 300 से ज्यादा कस्टमर हैं जो अमेरिका, यूरोप व एशिया के कई देशों तक फैले हैं। उसने पिछले पांच सालों में 3000 से ज्यादा सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग व सॉफ्टवेयर आर एंड डी में उसे दुनिया की अग्रणी कंपनियों में गिना जाता है।

कंपनी का धंधा भी ठीकठाक जा रहा है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में उसने 610.13 करोड़ रुपए की बिक्री पर 133.59 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था और उसका सालाना ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 35.41 रुपए था। हालांकि पिछले महीने घोषित नतीजों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2011-12 की जून तिमाही में उसकी ब्रिकी साल भर पहले की तुलना में 17.77 फीसदी बढ़कर 171.31 करोड़ पर पहुंच गई, पर शुद्ध लाभ 12.81 फीसदी घटकर 29.14 करोड़ रुपए पर आ गया।

हो सकता है कि शुद्ध लाभ में गिरावट ही वो वजह हो जिसके चलते कंपनी का शेयर (बीएसई – 533179, एनएसई – PERSISTENT) 18 जुलाई को इन नतीजों की घोषणा के बाद से करीब 22 फीसदी गिर चुका है। 18 जुलाई को इसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 384.80 रुपए तक गया था। लेकिन कल यह 301 रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का इसका न्यूनतम स्तर है।

इस गिरावट का एक और खास कारण अमेरिका व यूरोप में उभरा ताजा वित्तीय संकट रहा होगा क्योंकि इसकी चपेट में तो इनफोसिस, विप्रो व टीसीएस के स्टॉक तक आ चुके हैं। लेकिन सॉफ्टवेयर और आउटसोर्सिंग सेवाओं पर इतना घात कभी नहीं लगनेवाला कि परसिस्टेंट सिस्टम्स जैसी कंपनियां बैठ जाएं। परसिस्टेंट के पीछे एक कुशल प्रबंधन और दक्ष कर्मचारियों की टीम है जो हर संकट से कंपनी को निकालकर आगे ले जाएगी।

वैसे, शेयर बाजार के लिए परसिस्टेंट सिस्टम्स कोई ज्यादा पुरानी कंपनी नहीं है। इसका आईपीओ पिछले साल मार्च में आया था और इसकी लिस्टिंग 6 अप्रैल 2010 को हुई। आईपीओ में इसके शेयर 310 रुपए पर जारी किए गए थे और लिस्टिंग के दिन यह ऊपर में 448 रुपए तक जाने के बाद 408 रुपए पर बंद हुआ था। उसके बाद बढ़ते-बढ़ते यह जुलाई 2010 में 507.50 रुपए के शिखर तक पहुंच गया। अगले महीने भी यह 491.90 रुपए तक ऊंचा बना रहा। लेकिन तब से धीरे-धीरे लगातार गिर रहा है। और, अब 301 रुपए तक जा पहुंचा है। क्या यह शेयर यहां से बाउंस-बैक करेगा? शायद हाल-फिलहाल नहीं क्योंकि शेयरों के भाव कंपनी की आर्थिक व वित्तीय स्थिति से ही नहीं, बाजार के मिजाज से भी तय होते हैं।

इसलिए इस शेयर के अभी और नीचे जाने की गुंजाइश है। हालांकि कंपनी प्रबंधन नई-नई सकारात्मक बातें बताकर माहौल और मानसिकता को बदलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन बी ग्रुप के इस शेयर में कम से कम 15-20 दिन तक जान आती नहीं दिख रही। हालांकि ईस्टर्न फाइनेंशियर्स जैसी वित्तीय व निवेश सलाहकार फर्म इसे इस साल अप्रैल में तब से खरीदने को कहे जा रही है, जब यह 395 से 430 रुपए की रेंज में चल रहा था। ईस्टर्न फाइनेंशियर्स ने तब कहा था कि यह शेयर एक साल में 550 रुपए तक जा सकता है। अगले साल अप्रैल में देखेंगे कि उनकी ज्योतिषबाजी कहां तक सही निकली।

खैर, जून तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस घटकर 32.33 रुपए पर आ गया है और कल बीएसई के बंद भाव 303.10 रुपए पर उसका पी/ई अनुपात 9.37 निकलता है। कंपनी की इक्विटी 40 करोड़ रुपए है, जबकि उसके पास अभी 700.86 करोड़ रुपए के रिजर्व हैं। इसे जोड़कर कुल शेयरों की संख्या, 4 करोड़ से भाग देने पर कंपनी की प्रति शेयर बुक वैल्यू 185.22 रुपए निकलती है।

कंपनी की इक्विटी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 38.89 फीसदी है। बाकी 61.11 फीसदी शेयर पब्लिक के पास हैं। इसमें से 6.49 फीसदी एफआईआई और 25.06 फीसदी शेयर डीआईआई के पास हैं। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 30,479 है। इसमें से 8 बड़े शेयरधारक हैं जिनके पास कंपनी के 40.26 फीसदी शेयर हैं। इसमें से मॉरीशस में पंजीकृत नॉर्थवेस्ट वेंचर पार्टनर्स के पास सबसे ज्यादा 13.51 फीसदी शेयर हैं। रिलांयस कैपिटल के पास इसके 2.09 फीसदी शेयर हैं। इसके अलावा श्रीधर बालचंद्र शुक्ला और आशुतोष विनायक जोशी, दोनों के पास इसके बराबर-बराबर 2.63 फीसदी (10.50 लाख) शेयर हैं। जब इतने बड़े निवेशक कंपनी के साथ हैं, तो वे जरूर इसकी नैया भी पार लगाएंगे।

कंपनी निवेशकों के बीच आने के बाद बराबर लाभांश दे रही है। 2009-10 में उसने दस रुपए के शेयर पर 2.50 रुपए लाभांश दिया था, जबकि 2010-11 में कुल लाभांश 5.50 रुपए रहा है। हां, परसिस्टेंट सिस्टम्स ने इसी महीने की पहली तारीख को फ्रांस की एक सॉफ्टवेयर मार्केटिंग व डेपलपमेंट कंपनी एजिलेंट टेक्नोलॉजीज का अधिग्रहण पूरा कर लिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *