अकेला एलआईसी विदेशियों पर भारी

महीने का आखिरी गुरुवार। डेरिवेटिव सेगमेंट में सेटलमेंट का आखिरी दिन। निफ्टी का 4820 या 5000 होना इस बात पर निर्भर था कि बाजार चलानेवालों ने ऑप्शंस में किस तरफ का कॉल या पुट प्रीमियम पकड़ा है। जैसा पहले सामने आ चुका है कि 4600 पर पुट सौदे की बड़ी पोजिशन बन चुकी थी तो निश्चित रूप से 4600 की गुंजाइश खत्म हो गई थी। दूसरी तरफ ऐसा लगता है कि उन्होंने 5000 और 5100 की कॉल पर माल काटा है। इसलिए कम से कम आज के लिए 5000 की भी गुंजाइश नहीं थी। बाजार इन दोनों के बीच 1.01 फीसदी गिरकर 4839.60 पर बंद हुआ है। यह है अगले सेटलमेंट का आधार।

कल यहीं से ऑप्शंस में कॉल व पुट की नई बोलियों के साथ ताजा खेल शुरू होगा। यह शुद्ध रूप से 500 से 1000 करोड़ रुपए का धंधा बन चुका है और इसका प्रीमियम चुकाकर रिटेल निवेशक अपनी जेबें एकदम खाली कर चुका है। आइए देखते हैं कि एक पढ़े-लिखे व्यक्ति का शेयर बाजार की ट्रेडिंग के बारे में क्या कहना है।

उन्हीं के शब्दों में, “मुझे पता है कि बहुत से लोग शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे आसानी और जल्दी से काफी सारा धन कमाया जा सकता है। चूंकि अन्य व्यवसायों की तुलना में ट्रेडिंग की शुरुआती लागत कम है, इसलिए ट्रेडिंग उन्हें अमीर बनने का आसान रास्ता नजर आती है। उनका मकसद तेजी से खूब सारे नोट बनाना होता है। ये वो लोग है जो सेमिनारों में आते हैं तो चाहते हैं कि उन्हें ऐसा कोई सूत्र मिल जाए जिससे मुनाफे की गारंटी हो जाए। वे इस धंधे का ऊंच-नीच नहीं सीखना चाहते। वे तो कोई ऐसी जादुई ताबीज़ चाहते हैं जिससे उन्हें मनचाहा धन हासिल हो जाए। मुझे लगता है कि ट्रेडरों के बहुमत की यही मानसिकता है। इस सोच के चलते 95 फीसदी ट्रेडर कामयाब नहीं हो पाते।”

यह सच है। जब से बदला प्रणाली खत्म की गई है, जिसमें फिजिकल सेटलमेंट और ऑटोमेटिक रोलओवर की व्यवस्था थी, तभी से ट्रेडर व निवेशक दिन-ब-दिन कंगाल होते जा रहे हैं और उनकी निवेश करने की क्षमता घटती जा रही है। इसलिए जो भी यह दावा करता है कि हमारे बाजार विस्तृत हुए हैं, वह एकदम गुमराह करनेवाला और एक नंबर का झूठा है। हां, इतना जरूर हुआ है कि एफआईआई का दखल बढ़ा है जो भारी उथल-पुथल का सबब बन गया है क्योंकि एफआईआई दूसरे देशों के लोगों के धन से खेलते हैं। बल्कि, दूसरे देशों के लोग भी उनके इस खेल से नुकसान उठा रहे हैं।

क्या आपने कभी देखा है कि अमेरिकी अपने देश और अपने स्टॉक एक्सचेंजों में भारतीयों के रहमोकरम पर निर्भर हों? ऐसा कभी हो ही नहीं सकता। लेकिन भारत में हम चाहते हैं कि विदेशी हमारे बाजार पर राज करें जबकि भारतीयों के पास इन विदेशियों से ज्यादा धन है। अकेले एलआईसी का ही निवेश योग्य धन सारे एफआईआई की सम्मिलित रकम से ज्यादा है। महज 1.7 फीसदी भारतीय लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं। अगर इस संख्या को कोशिश करके 10 फीसदी तक भी ले आया जाए तो शेयर बाजार में 50 अरब डॉलर के बराबर नई रकम आ जाएगी।

अगर स्विटजरलैंड की अर्थव्यवस्था भारतीयों के कालेधन की बदौलत चल रही है तो हम भारतीय अपने प्रगति खुद क्यों नहीं कर सकते? जब भी ऐसा होगा, हम अपने पूंजी बाजार में एक तरह की क्रांति देख सकते हैं। अण्णा भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। भ्रष्टाचार ने इस बाजार को भी जकड़ रखा है, लेकिन अण्णा इसकी जटिलता और तौर-तरीकों को नहीं समझ सकते।

एक एफआईआई ब्रोकर एसबीआई को 2400 रुपए से ही एकतरफा बेचे जा रहा है और उसने आज एसबीआई को डाउनग्रेड करने की रिपोर्ट जारी कर दी। अब वह अपनी पोजिशन का इस्तेमाल निचले स्तरों पर एसबीआई को खरीदने में करेगा। यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि नियमित ढर्रा बन चुका है क्योंकि हमारे बाजार में इस पर अंकुश लगाने का कोई कायदा-कानून नहीं है। उसके खेल के चलते एसबीआई आज और भी नीचे 1954 रुपए पर आ गया। यह 52 हफ्ते का उसका न्यूनतम स्तर है।

आप मनचाहे स्टॉक्स को चुनकर और सही मौके पर उन्हें बेचकर नोट बना सकते हैं। मेरा अनुभव है कि जब भी किसी स्टॉक को डाउनग्रेड किया जाता है तो वो किश्तों में उसे खरीदने का सबसे मुनासिब वक्त होता है। जब भी बाजार सुधरेगा तो ऐसे स्टॉक्स का अपग्रेड खुद-ब-खुद हो जाएगा जिससे आपको मुनाफा कमाकर निकलने का मौका मिल जाएगा। लेकिन इसके लिए बड़े धैर्य की जरूरत है।

समझदारी का एक ही पैमाना है कि आप बदले हालात में कैसे खुद को ढाल लेते हैं।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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