एयर इंडिया निजी हाथों में नहीं, न ही आईपीओ

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया में विनिवेश की संभावनाओं से इनकार किया है और कहा है कि धन की तंगी से जूझ रही इस कंपनी को घाटे से उबारने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि ने गुरुवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर कहा, “एयर इंडिया में विनिवेश की कोई योजना नहीं है और न ही निकट भविष्य में कंपनी का कोई प्रारम्भिक पब्लिक इश्यू (आईपीओ) लाने का विचार है। नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर मेरी पहली प्राथमिकता कंपनी को घाटे से उबारना है।”

रवि ने कहा मंत्री समूह जल्द ही बैठक करेगा और सार्वजनिक क्षेत्र की इस विमानन कंपनी की स्थिति की समीक्षा करेगा। इससे पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल गिल्ड द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न समितियों और आयोग के इस प्रस्ताव और सिफारिश पर गौर करेगी कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल के कार्यपरिवेश में अंतरराष्ट्रीय नागरिक उडडयन संगठन के मानकों के अनुरुप सुधार लाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अंतरराष्ट्रीय संगठन की सिफारिशों के अनुरूप सरकार एयर ट्रैफिक कंट्रोल को भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण से अलग करने की योजना बना रही है। इस समय हवाई परिवहन प्रबंधन और संचार प्रणाली व निगरानी का काम हवाईअड्डा प्राधिकरण के तहत आता है।

देश में हवाई संपर्क बढ़ाने पर जोर देते हुए रवि ने कहा इस क्षेत्र में भारत नौवां बड़ा बाजार है। जहां तक यात्रियों की संख्या की बात है तो अमेरिका, चीन और जापान के बाद भारत का चौथा स्थान है। लेकिन मेरा मानना है कि हवाई संपर्क उपयुक्त स्तर तक नहीं बढ़ा है।

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