खुशियों की फैंसीड्रेस

पीछे मुड़कर देखने व अफसोस करने की जरूरत नहीं है क्योंकि ज़िंदगी में कभी भी कुछ भी पीछे नहीं छूटता। न खुशियां, न अवसर, न चुनौतियां। वे भेष बदलकर सामने आती रहती हैं। देखिए तो सही, पहचानिए तो सही।

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