चलें अब यूलिप छोड़ यूएलपी की राह

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के बीच यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को लेकर मची जंग के पटाक्षेप के बाद अब बीमा कंपनियों के लिए संभवत: यूलिप का आकर्षण कम हो सकता है। लिहाजा अब वे यूनिवर्सल लाइफ पॉलिसी (यूएलपी) लाने की संभावनाएं तलाश कर रही हैं।

एक उत्पाद में दो फायदे: यूएलपी दरअसल एक उत्पाद में दो प्रकार की पॉलिसियों के फायदे देती है। यह यूलिप व परंपरागत प्लान की मिलीजुली बीमा पॉलिसी है। इसकी संरचना यूलिप की तरह है पर इसकी निवेश रणनीति परंपरागत प्लान की तरह होती है। चार्ज के मामले में यूलिप की तर्ज पर, लेकिन इसमें तकरीबन 80 फीसदी राशि ऋण प्रपत्रों में निवेश की जाती है। इसका रिटर्न बीमा कंपनी द्वारा आवधिक रूप से घोषित दर पर निर्भर करता है।

दो उत्पाद हैं बाजार में: वैसे इन दिनों इरडा यूनिवर्सल लाइफ पॉलिसी के बारे में दिशानिर्देश तैयार करने में जुटा है। संभवत: कुछ महीने में यह काम पूरा हो जाएगा। तब बीमा कंपनियां धड़ल्ले से इस प्रकार के उत्पाद लांच करेंगी। लेकिन पिछले दिनों जब यूलिप को लेकर नियामकों के बीच बचाल मचा था, तभी दो निजी बीमा कंपनियों ने बाजार में अपनी-अपनी यूएलपी पेश कर दी। पहली योजना है मैक्स न्यूयार्क लाइफ की सिक्योर ड्रीम्स जबकि दूसरी है रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की ट्रेडिशनल इन्वेस्टमेंट इंश्योरेंस।

पासबुक योजना सरीखी: यह बैंक पासबुक सरीखी बीमा योजना होगी जिसमें बीमाधारक को प्रीमियम राशि व सम एश्योर्ड कम-ज्यादा करने की आजादी होगी। यह काम उसकी मनमर्जी पर होगा। मतलब किसी कारण से वे प्रीमियम भरने में असमर्थ हो गए तो वे छोटे सम एश्योर्ड व प्रीमियम की ओर जा सकते हैं। इसी तरह जैसे ही उनके पास अतिरिक्त धन आना शुरू हो गया तो वे सम एश्योर्ड व प्रीमियम राशि में बढ़ोतरी भी कर सकते हैं।

लैप्स प्रोटेक्शन की सुविधा भी: बीमाधारकों की सुविधा के लिए इरडा यूएलपी में लैप्स प्रोटेक्शन की सुविधा भी देगा। यानी जब तक ग्राहक रेगुलर प्रीमियम भरेगा तब तक उसे लाभ मिलेंगे। पर अगर लैप्स प्रोटेक्शन की नौबत आई तो मृत्यु की स्थिति में मैच्योरिटी राशि में से कर्ज ली गई रकम काटकर भुगतान कर दिया जाएगा।

प्रीमियम अवधि चुनने की आजादी: आम बीमा पॉलिसियों की अवधि तो एजेंटों की कृपा पर निभर होती है पर यूएलपी के बीमाधारक के पास प्रीमियम भुगतान अवधि का चयन करने की आजादी होगी। वह अपनी सुविधानुसार प्रीमियम मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना अथवा एकमुश्त भर सकता है। हालांकि वह भरे जाने वाले प्रीमियम की राशि को बदल नहीं सकता। दूसरे शब्दों में वह निर्धारित सीमा से ज्यादा या कम प्रीमियम नहीं भर सकता। पर जब वह प्रीमियम भरने में असमर्थ हो जाएगा, तब उसके आश्रितों को डेथ बेनिफिट नहीं दिया जाएगा।

अपने-आप निरस्त नहीं होगी: अमूमन बीमा पॉलिसी प्रीमियम का भुगतान न करने पर कैंसल हो जाती हैं। लेकिन यूएलपी का सबसे प्रमुख फीचर यह है कि यह ग्राहक द्वारा प्रीमियम न भरने पर स्वत: कैंसल नहीं होगी। पर शर्त यह है कि ग्राहक द्वारा उस दिन तक भरा गया प्रीमियम पॉलिसी संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो।

यूलिप व यूएलपी में अंतर: अमूमन यूएलपी भी यूलिप की तरह काम करती है कि आप प्रीमियम का भुगतान कीजिए व सम एश्योर्ड का चुनाव कीजिए। यह सम एश्योर्ड प्रीमियम के गुणक में होता है। आपके प्रीमियम का एक प्रमुख हिस्सा प्रीमियम एलोकेशन चार्ज के रूप में जाता है और बाकी रकम निवेश की जाती है। इसके अलावा भी आपको मॉरटैलिटी चार्ज व एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज आदि देने पड़ते हैं। पर दोनों में अंतर निवेश रणनीति के मामले में है। यूलिप में रोजाना घोषित की जाने वाली नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के जरिए आप हर दिन की समाप्ति पर यह जान सकते हैं कि आपका निवेश कम हुआ है या बढ़ गया है।

रिटर्न बीमा कंपनी द्वारा घोषित दर पर: ध्यान रहे कि यूएलपी मुख्यत: ऋण उत्पादों में निवेश की जाती है और इसका रिटर्न बीमा कंपनी द्वारा समय-समय, यानी एक तय अवधि पर घोषित की जाने वाली दर पर निर्भर होता है। इसका मतलब यह हुआ कि यूएलपी में आपका निवेश तभी कम ज्यादा होगा जबकि बीमा कंपनी द्वारा नई दरें घोषित की जाएंगी।

बाजार में मौजूद यूएलपी: मैक्स न्यूयार्क लाइफ की सिक्योर ड्रीम्स में बीमाधारक भुगतान किए गए प्रीमियम का दस गुना तक सम एश्योर्ड ले सकता है। पॉलिसी टर्म के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाने की दशा में बाकी प्रीमियम माफ करते हुए आश्रित/नॉमिनी को सम एश्योर्ड की रकम बीमा कंपनी अदा कर देगी। लेकिन मैच्योरिटी की हालत में बीमाधारक को एडिशनल फंड वैल्यू मिलेगी।

दूसरी यूएलपी है रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की टे्रडिशनल इन्वेस्टमेंट इंश्योरेंस। इसमें बीमा कवर आपके द्वारा भुगतान किए गए प्रीमियम का 7.5 गुना निश्चित है। यह यूएलपी टाइप-1 श्रेणी की यूलिप के समान है जिसमें सर्वोच्च सम एश्योर्ड या डेथ बेनिफिट के रूप में हायर फंड वैल्यू का भुगतान किया जाता है। इसमें निवेश किया गया आपका धन बीमा कंपनी द्वारा हर साल नई दरें घोषित करने के साथ बढ़ता जाता है। मसलन वित्त वर्ष 2010-11 के लिए दर 7.75 फीसदी है। हालांकि हर साल यह दर बदल जाती है, पर यह बैंकों के बचत खातों की ब्याज दर, मौजूदा समय में 3.5 फीसदी से कम नहीं हो सकती।

– राजेश विक्रांत (लेखक बीमा प्रोफेशनल हैं)

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