मिलेंगे आसान भाषा में पॉलिसी दस्तावेज

बीमा नियामक प्राधिकरण, आईआरडीए (इरडा) बीमा उद्योग में व्याप्त मिस-सेलिंग को रोकने के उपाय करने जा रहा है। उसने इसके लिए पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित रेगुलेशन, 2002 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसमें सबसे खास बात यह है कि बीमा कंपनी को अपनी पॉलिसी बेचने से पहले निवेशक को कानूनी भाषा की जटिलता से बाहर निकलकर साफ-साफ बताना होगा कि वह कौन सा उत्पाद खरीदने जा रहा है और उसके क्या फायदे नुकसान हैं। यहां तक कि कभी दिक्कत आई तो वह किससे और कहां शिकायत कर सकता है। इरडा ने अपना संशोधन प्रस्ताव सभी बीमा कंपनियों व ग्राहक संगठनों को भेज दिया और आम लोगों समेत सभी संबंधित पक्षों से 20 जून 2010 तक प्रतिक्रिया मांगी है। यह प्रतिक्रिया ई-मेल पते ypriyab@irda.gov.in पर भेजी जा सकती है।

इरडा के कार्यकारी निदेशक ए गिरिधर की तरफ से भेजे गए इस प्रारूप दस्तावेज में कहा गया है कि उसका मकसद पॉलिसीधारकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए नियमों को बदलना है। इस सिलसिले में शुरुआती रेगुलेशन 2002 में बनाए गए थे। लेकिन बीमा एक जटिल उत्पाद है और यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) आने के बाद जटिलता थोड़ी और बढ़ गई है। ऐसे में पॉलिसीधारक और बीमा कंपनी के बीच के ‘इनफॉरमेशन गैप’ का भरना या खत्म करना जरूरी हो गया है।

खासकर, बीमा उत्पाद के प्रचार और बिक्री के दौरान अधिकतम पारदर्शिता की जरूरत है ताकि पॉलिसीधारक किसी गफलत में न रहे। अभी तक बीमा उत्पादों के साथ कंपनियां कागजातों का लंबा पुलिंदा ग्राहक को थमा देती हैं, जिनके फॉन्ट इतने छोटे होते है कि पढना मुश्किल होता है। दूसरे उसमें धारा, अनुच्छेद, किंतु, परंतु की कानूनी भाषा लिखी होती है जो पढ़े-लिखे ग्राहक को भी समझ में आनी मुश्किल होती है। इरडा का कहना है कि भारत में अब भी 30 फीसदी से ज्यादा लोग निरक्षर हैं। ऐसे में बीमा प़ॉलिसी के बारे में ग्राहक को साफ-साफ समझाना निहायत जरूरी हो गया है।

इसलिए इरडा का प्रस्ताव है कि बीमा अनुबंध के दस्तावेजों में पॉलिसी के मुख्य पहलू बतानेवाला एक दस्तावेज अलग से शामिल किया जाए। इसमें पॉलिसी के हर पहलू को सीधी सरल भाषा में बताया जाएगा। खास बात यह है कि इस दस्तावेज की वही कानूनी वैधता होगी जो साथ के पॉलिसी दस्तावेज की। यह इतना बड़ा भी नहीं होना चाहिए कि मुद्दे से भटक जाए और इतना छोटा भी नहीं होना चाहिए कि पॉलिसी के अहम पहलू छूट जाएं। बीमा नियामक ने इसके लिए अपनी तरफ से चार पॉलिसियों – एलआईसी जीवन आनंद, वेल्थ प्लस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोर एवर लाइफ और बजाज एलियांज की फेमिली केयर फर्स्ट के लिए एक खाका भी पेश किया है।

इस प्रारूप में खास बात यह है कि इससे ग्राहक को पॉलिसी के मकसद से लेकर उसकी अवधि और निवेश व दावे के भुगतान तक सारी जानकारी एक टेबल में बनाकर मिल जाएगी और वह भी कम से कम 14 साइज के फॉन्ट में। साथ ही ग्राहक को उसकी भाषा में यह दस्तावेज उपलब्ध कराना होगा। यानी, इसे पठने व समझने में आसान हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं में पेश करना होगा। इरडा ने जो खाका पेश किया है, उसके मुताबिक यह दस्तावेज दो से पांच-छह पेज का हो सकता है। इस दस्तावेज में सबसे ऊपर साफ-साफ लिखा होगा कि यह समझना जरूरी है कि आप क्या खरीद रहे हैं। कृपया यह दस्तावेज सावधानी से पढ़ें। अगर आपके कोई सवाल हैं तो पूरे विवरण के साथ अपनी बीमा कंपनी से संपर्क करें।

3 Comments

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