ऑटो से निकलें, रीयल्टी को पकड़ें

बाजार में रोलओवर का आगाज़ हो चुका है। लेकिन एक बात गौर करने की है कि निफ्टी में पुट ऑप्शन के सौदे 5600, 5500 व 5400 के स्तर पर हुए हैं यानी, यहां तक निफ्टी गया तो चाहें तो उसे बेच सकते हैं, पर बेचने की कोई बाध्यता नहीं है। इसलिए बहुत कम गुंजाइश है कि बाजार 5900 अंक से नीचे जाएगा। इसके साथ ही निफ्टी के कॉल ऑप्शन में 6000, 6100 व 6200 पर कोई खास सौदे नहीं हुए हैं। इसलिए इस बात की संभावना है कि बाजार 6200 के ऊपर चला जाए। ऐसे में दोनों ही तरफ से सावधान रहने की जरूरत है।

अब सच्चाई का दूसरा पहलू। अभी तक आपने मुझे भारत की विकासगाथा पर बाजार में तेजी की मजूबत वकालत करते हुए देखा है। लेकिन इस विकासगाथा का एक स्तंभ राष्ट्रमंडल खेलों में पुल के गिरने के साथ ही ढह चुका है। कल मजाक चल रहा था कि एक मंत्री ने शर्मिंदगी के कारण खुद को मुख्य स्टेडियम की छत से लटकाने की कोशिश की तो छत ही बीच से टूट गई। खैर, यह मजाक का नहीं, गंभीर मसला है। राष्ट्रमंडल खेलों की व्यवस्था की दुर्दशा ने भारत व यहां के उद्योग जगत की छवि को धूमिल किया है। यह हमारे जीडीपी विकास और धन के आगम को लगा पहला सदमा है।

दूसरे, बाढ़ के चलते उत्तर भारत का ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर तहस-नहस हो गया है। इससे ऑटो क्षेत्र की बिक्री को चोट पहुंचेगी। खासकर उत्तर भारत में मजूबत पकड़ रखनेवाली हीरो होंडा और मारुति जैसी ऑटो कंपनियों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। इन कंपनियों को आभास हो गया है कि इससे कम से कम उनकी दो तिमाहियों की बिक्री प्रभावित होगी, इसलिए वे कैश डिस्काउंट बढ़ाने लगी हैं। बजाज ऑटो और टीवीसी इस आफत से बची हुई हैं क्योंकि उनका मुख्य बाजार देश के पश्चिमी और दक्षिणी भाग में है।

क्या किसान मारुति या हीरो होंडा की गाड़ियां खरीदेंगे, जबकि फिलहाल उनके पास चलाने के लिए सड़क ही नहीं, कमाई के लिए खेत नहीं बचे और रहने का कोई ठौर नहीं रहा? यह बड़ा सवाल है और इसके आधार पर आपको इन दो कंपनियों की किस्मत का फैसला करना है। मारुति सुजुकी के स्टॉक को हम 1200 रुपए से 1500 रुपए पर ले आए। लेकिन यह काउंटर अब ओवरबॉट हालत में पहुंच गया है। इसलिए फिलहाल इसे बेचकर निकल लेना चाहिए और 1200 तक आ जाए तो फिर से खरीद लें।

देश की यह हालत का सबसे बड़ा फायदा स्टील और सीमेंट क्षेत्र को मिलेगा। भले ही यह सच है कि सीमेंट उद्योग की क्षमता इधर बढ़ चुकी है। धवस्त हो चुके इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने के लिए एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की पूंजी खर्च करनी पड़ेगी और इसका असर सरकार के खजाने पर पड़ेगा जिससे राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ेगा।

वैसे, आपको बता दें कि एनालिस्टों के समुदाय में से एक को छोड़कर बाकी सभी निवेश पोर्टफोलियो से हीरो होंडा को बाहर निकालने के बारे में एक राय रखते हैं। मेरा कहना है कि ऑटो सेक्टर में निवेश घटा दें और रीयल्टी में खरीद शुरू करें। अभी तक रीयल एस्टेट कंपनियों के पास जितनी जमीन थी, वे उसका उपयोग कर चुकी हैं। हर तरफ नई जमीन खरीदी जाने लगी है और कीमत अब भी आसमान का रुख किए हुए है। कहीं से नहीं लगता कि रीयल्टी स्टॉक्स अंडर परफॉर्म करेंगे।

एचडीआईएल, सेंचुरी और बॉम्बे डाईंग मुंबई की कंपनियां हैं। इन सभी के लाभ और खर्च में साफ बढोतरी देखी जा सकती है क्योंकि यह इलाका नकारात्मक प्रभावों से एकदम अछूता रहा है। दूसरे, यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने के चलते मांग भी बढ़ रही है।

हर किसी के पास शेयरों से पैसे बनाने का दिमाग होता है, लेकिन कुछ के पास ही इसे पचाने का पेट होता है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ हैलेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

1 Comment

  1. Tata steel 622 me aaj bech dia, kya phir buy kar le.

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