कार्बोरनडम: नाम अटपटा, बाकी ठीक

हर दिन 52 हफ्तों का पहला या आखिरी दिन होता है और हर दिन कोई कंपनी 52 हफ्ते का शिखर बनाती है तो कोई कंपनी 52 हफ्ते के रसातल पर चली जाती है। तो क्यों न हम रसातल में जानेवाली कंपनियों से कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर उन कंपनियों पर लगाएं तो अपनी संभावनाओं के दम पर इस पस्त बाजार में भी सीना तानकर बढ़ी जा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है कार्बोरनडम यूनिवर्सल। उसके शेयर ने पिछले ही हफ्ते 27 जुलाई 2011 को 330 रुपए पर नया शिखर बनाया है। उसका न्यूनतम स्तर 186.05 रुपए का रहा है जो उसने साल भर पहले 30 अगस्त 2010 को हासिल किया था। कल कंपनी का दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई (कोड – 513375) में 301.55 रुपए और एनएसई (कोड – CARBOUNIV) में 302.75 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी अपने दो रुपए अंकित मूल्य के शेयर को एक रुपए अंकित मूल्य के दो शेयरों में स्प्लिट करने जा रही है। इस पर दो दिन बाद शुक्रवार, 5 अगस्त को उसके निदेशक बोर्ड की मीटिंग होनी है।

मालूम हो कि कार्बोरनडम यूनिवर्सल एक सदी से ज्यादा पुराने दक्षिण भारत के मुरुगप्पा समूह की कंपनी है। खुद 1954 में बनी। बीस हजार तरह के उत्पाद बनाती है। एब्रेसिव, इलेक्ट्रो मिनिरल व रीफैक्ट्रीज श्रेणी में आनेवाले ये उत्पाद बॉक्साइट के खनन व कैल्सिनेशन से बनाए जाते हैं। ये उत्पाद सीधे आम उपभोग के नहीं हैं, बल्कि खास उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं। इन उद्योगों में सिरैमिक्स, कार्बन ब्लैक, सीमेंट, ग्लास, टाइल्स, बिजली उत्पादन और स्टील वगैरह-वगैरह शामिल हैं। कंपनी की उत्पादन इकाइयां भारत समेत रूस, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, कनाडा, अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोप में करीब 25 जगहों पर लगी हैं।

इधर कंपनी अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र का धंधा पकड़ने की कोशिश में है। जर्मन कंपनी बॉश सोलर एनर्जी के साथ उसने पहले से हाथ मिला रखा है। वह असल में अक्षय ऊर्जा जनरेटरों के लिए सिलिकॉन वेफर व इन्हें प्रोसेस करनेवाली सामग्रियां सप्लाई करने की योजना पर काम कर रही है। वह इस सिलसिले में तीन संयुक्त उद्यमों को अंतिम रूप देने में लगी है। इनमें से दो संयुक्त उद्यमों (जेवी) की घोषणा हो सकता है कि इसी अगस्त महीने में हो जाए। ये संयुक्त उद्यम कोच्चि के अक्षय ऊर्जा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में लगाए जाएंगे। इन संयुक्त उद्यमों में जो निवेश होगा, अलग है। इनके ऊपर कंपनी की योजना इस करीब 150 करोड़ रुपए के पूंजी निवेश की है।

शायद इन्हीं योजनाओं व संभावनाओं के मद्देनजर बाजार कंपनी के स्टॉक को फिलहाल ज्यादा भाव दे रहा है। वरना अभी तक की उपलब्धियों को देखें तो शेयर कोई सस्ता नहीं लगता। वित्त वर्ष 2010-11 में उसने कंसोलिडेटेड रूप से 1644.25 करोड़ रुपए की आय पर 170.79 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है और उसका प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) 18.27 रुपए निकलता है। वहीं स्टैंड-एलोन रूप से उसकी आय 936.25 करोड़, शुद्ध लाभ 124.25 करोड़ और ईपीएस 13.29 रुपए रहा है। स्टैंड-एलोन ईपीएस को लें तो उसका शेयर इस समय 22.7 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो यह स्टॉक पिछले साल भर में 33 से 43 तक के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो चुका है।

फिलहाल बी ग्रुप में शामिल इस शेयर में मुनाफावसूली का दौर चल रहा है। 300 रुपए से नीचे 290 रुपए के आसपास आ जाए तो इसे दूरगामी निवेश के लिए खरीदा जा सकता है। ब्रोकरेज फर्म एडेलवाइस के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन सालों में कार्बोरनडम यूनिवर्सल की बिक्री 25.27 फीसदी और मुनाफा 28.28 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। कंपनी का नेटवर्थ या इक्विटी पर रिटर्न 25.42 फीसदी है।

कंपनी की इक्विटी शेयर पूंजी 18.69 करोड़ रुपए है जो फिलहाल दो रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है, लेकिन जल्दी ही इसे एक रुपए के शेयरों में बांट दिया जाएगा। इसके ऊपर से कंपनी के पास 50 करोड़ रुपए की ऋण पूंजी भी है। इक्विटी का 42.15 फीसदी हिस्सा प्रवर्तकों और 57.85 फीसदी हिस्सा पब्लिक के पास है। पब्लिक के हिस्से में 13.38 फीसदी शेयर एफआईआई और 15.67 फीसदी शेयर डीआईआई (घरेलू निवेशक संस्थाओं) के पास हैं।

कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 16,346 है। उसके बड़े शेयरधारकों में एचडीएफसी म्यूचुअल फंड (6.03 फीसदी), नालंदा इंडिया फंड (8.97 फीसदी), सुदर्शन सिक्यूरिटीज (2.11 फीसदी), एलआईसी (1.83 फीसदी), जीआईसी (1.60 फीसदी), न्यू इंडिया एश्योरेंस (1.68 फीसदी) और अमान्सा इनवेस्टमेंट्स (1.78 फीसदी) शामिल हैं। कंपनी कई सालों से बराबर लाभांश देती रही है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 के लिए उसने दो रुपए अंकित मूल्य के शेयर पर कुल 2.50 रुपए का लाभांश दिया है। वैसे, शेयर के बाजार भाव को देखते हुए उसका लाभांश यील्ड 0.83 फीसदी ही निकलता है।

चलते-चलते बता दें कि मुरुगप्पा समूह की सात कंपनिया स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध हैं। इनके नाम से शायद आप वाकिफ होंगे। ये कंपनियां हैं – चोलमंडलम इनवेस्टमेंट, कोरोमंडल इंटरनेशनल, कोरोमंडल इंजीनियरिंग, ईआईडी पैरी, पैरी एग्रो, ट्यूब इनवेस्टमेंट्स, वेंट इंडिया।

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