हमेशा याद रखें। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग ‘ज़ीरो-सम गेम’ है। किसी का नुकसान, दूसरे का फायदा। यहां पक्का कुछ नहीं, सिर्फ और सिर्फ प्रायिकता चलती है। लग गया तो तीर, नहीं तो तुक्का। मोटा-सा नियम कि जिस स्टॉक को खरीदने की आतुरता ज्यादा, वो बढ़ेगा और जिसे बेचने की व्यग्रता ज्यादा, वो गिरेगा। यह भी ध्यान रहे कि देशी-विदेशी संस्थाओं की खरीद या बिकवाली से ही शेयरों के भाव पर असर पड़ता है। प्रोफेशनल ट्रेडर यही पकड़नेऔरऔर भी

कोरोना संक्रमण में भारत एक बार फिर तेज़ी से छलांग लगा रहा है। अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर। समूची दुनिया में खबर लिखे जाने के वक्त 13.72 करोड़ मामले जिसमें से 1.37 करोड़ (लगभग 10%) अकेले भारत में। हमारी करीब 1% आबादी कोविड-19 वायरस की चपेट में आ चुकी है। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और इसमें भी सबसे ज्यादा आर्थिक राजधानी मुंबई में। फाइनेंस की दुनिया बदस्तूर धड़क रही है। शेयर बाज़ार अपनी रफ्तार से सूं-सां करऔरऔर भी

करीब डेढ़ महीने से शेयर बाज़ार पर छाया उन्माद थमता दिख रहा है। 16 फरवरी को निफ्टी ने 15,431.75 का शिखर पकड़ा था। तब से उसकी हालत लस्टम-पस्टम है। कभी इस बहाने तो कभी उस बहाने मुनाफावसूली बाज़ार को दबा ले जाती है। सुबह खरीदकर उसी शाम या अगली शाम बेचकर मुनाफा कमा लेने की अंधी चाल गच्चा देने लगी है। अब तेज़ी के उन्माद में बाज़ार के कूदे नए-नवेले ट्रेडरों को सोचना पड़ रहा है। क्याऔरऔर भी

साल भर से चल रहे कोरोनाकाल में बहुतों की नौकरी गई, बहुतों के धंधे बैठ गए। डूबती अर्थव्यवस्था में ना तो नौकरी के नए अवसर मिले और ना ही धंधे का स्कोप दिखा। बहुतों को लगा कि क्यों ना अब तक बचाए गए धन से ही धन बनाया जाए। सो, शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में कूद पड़े। इधर 20-25 साल के नौजवानों को भी बाज़ार का चस्का लग गया। बाज़ार बढ़ रहा है तो मौजा ही मौजा।औरऔर भी

शेयर बाज़ार तेज़ी पर हो तो झूमकर आईपीओ आते हैं। फिलहाल यही स्थिति है। मगर सावधान रहें। हर चमकनेवाली चीज़ सोना नहीं होती। फार्मास्युटिकल केमिकल्स बनानेवाली 32 साल पुरानी एक कंपनी का आईपीओ बीते 21 सितंबर को आया। 340 रुपए पर जारी शेयर पहली अक्टूबर को लिस्ट हुआ तो दोगुने से ज्यादा 744 रुपए तक चला गया। लेकिन फिर गिरने लगा तो बीच-बीच में थोड़ा उठने के बाद रपटता ही जा रहा है। पता चला कि कंपनीऔरऔर भी